
यूनिक समय, नई दिल्ली। कर्नाटक सरकार के स्वामित्व वाले परिवहन निगमों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आज 5 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसके चलते राज्य भर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) और उत्तर पश्चिम कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (NWKRTC) की बसें मंगलवार सुबह से सड़कों पर नहीं उतरीं। धारवाड़, हुबली, गडग और मांड्या सहित राज्य के अधिकांश हिस्सों में हड़ताल का असर साफ देखा जा रहा है। हड़ताल के कारण बस स्टैंडों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई, जिनमें से कई ग्रामीण इलाकों से आए थे और उन्हें इस हड़ताल की जानकारी नहीं थी। मजबूरी में लोग निजी बसों और अन्य वाहनों का सहारा ले रहे हैं।
कर्मचारियों की मांगें और सरकार का रुख
कर्मचारी संघ की मुख्य मांगें हैं कि उन्हें 38 महीने का बकाया वेतन (लगभग ₹1,785 करोड़) और 1 जनवरी 2024 से वेतन वृद्धि लागू की जाए।
इस मुद्दे को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने सोमवार को कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही। सरकार ने 14 महीने के बकाए का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन संघ ने इसे अस्वीकार कर दिया।
हाईकोर्ट का आदेश और प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को एक अंतरिम आदेश जारी कर कर्मचारी संघों को हड़ताल को टालने का निर्देश दिया था, लेकिन कर्मचारी संघों ने इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया।
NWKRTC की प्रबंध निदेशक एम. प्रियंगा ने कहा है कि यात्रियों को परेशानी न हो, इसके लिए कदम उठाए गए हैं और परिवहन एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है, इसलिए कर्मचारियों को हड़ताल में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाना चाहिए और सरकार इस मुद्दे को लेकर सकारात्मक रूप से जवाब दे चुकी है।
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