
यूनिक समय, वृन्दावन। 25 नवंबर को बिहारपंचमी पर्व पर जन-जन के आराध्य भगवान श्री बांकेबिहारीजी महाराज का 482 वां प्राक्ट्योत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, श्रीहरिदासपीठ मंदिर एवं निधिवनराज में अनेक कार्यक्रम होंगे। इस दिन निधिवनराज से ठाकुर बांके बिहारी मंदिर तक निकलने वाली स्वामीहरिदासजी महाराज की भव्य बधाई शोभायात्रा रहेगी।
श्रीहरिदास पीठाधीश्वर इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 1543 ई. में मार्गशीष माह की शुक्ल पक्षीय पंचमी तिथि की भोरवेला में संगीत सम्राट श्रीस्वामीहरिदास महाराज की निकुंज उपासना के फलस्वरूप निधिवनराज की पवित्र धरणी से युगल जोड़ी के रूप में आराध्यप्रभु श्यामा श्याम का प्राक्ट्य हुआ था। हरिदासजी की लोकहितकारी प्रार्थना पर पर एकाकार हुए उन्ही युगलसरकार को वर्तमान में ठाकुर श्रीबाँकेबिहारीजी महाराज के शुभनाम से जाना जाता है।
इतिहासकार के अनुसार भगवान ठाकुर बांकेबिहारी महाराज के 482 वां प्राक्ट्योत्सव पर 25 नवंबर को प्रातःकाल निधिवन स्थित श्रीबांकेबिहारीजी के प्रागंण स्थल का पंचगव्य पदार्थों से दिव्य अभिषेक करके विशेष आरती उतारी जाएगी। उत्सवीय वेला में पीत वस्त्राभूषणों से सजे संवरे ठाकुरजी को शुद्ध देशी घी से निर्मित मूंगदाल व सूजी का मोहनभोग (हलुआ) एवं मेवा पदार्थों का विशेष भोग धराया जाएगा।
इसके बाद स्वामीहरिदास जी शोभायात्रा के साथ नगर भ्रमण करते हुए दोपहर करीब 12 बजे अपने आराध्य श्रीबाँकेबिहारीजी महाराज को प्रादुर्भावोत्सव की बधाई देने श्रीबिहारीजी मंदिर पहुंचेंगे। यहां श्रीहरिदासबिहारीजी महाराज को संयुक्त रूप से भोगराग धराने के बाद राजभोग आरती उतार कर भक्तों को उपहार वितरित किए जाएंगे।
इस मौके पर श्रीहरिदासपीठ मंदिर में श्री हरिदासबिहारी फाउंडेशन भारत ट्रस्ट द्वारा परम्परागत बधाई महोत्सव का आयोजन किया जाएगा।
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