
यूनिक समय, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग आज अपने 20वें दिन में प्रवेश कर गई है, लेकिन बुधवार की रात जो हुआ उसने पूरी दुनिया की सांसें थाम दी हैं। इजरायल ने पहली बार ईरान के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक आर्थिक केंद्र—साउथ पार्स गैस फील्ड (South Pars Gas Field)—पर अब तक का सबसे भीषण हमला किया है। यह हमला न केवल सैन्य है, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने वाला कदम माना जा रहा है।
धुआं-धुआं हुआ सबसे बड़ा गैस भंडार
ईरान और कतर की सीमा पर फैला साउथ पार्स गैस फील्ड दुनिया का सबसे बड़ा गैस भंडार है। इजरायली मिसाइलों के गिरने के बाद इस गैस फील्ड में भीषण आग लग गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरे इलाके में धुएं का काला गुबार छाया हुआ है और आग की लपटें कई किलोमीटर दूर से देखी जा सकती हैं।
खास है साउथ पार्स?
साउथ पार्स गैस फील्ड ईरान के लिए न केवल ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत है, बल्कि यह देश की घरेलू गैस आपूर्ति का 70% हिस्सा कवर कर उसकी ‘लाइफलाइन’ के रूप में कार्य करता है। वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर LNG की सप्लाई करने वाला यह क्षेत्र ईरान की अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ माना जाता है, क्योंकि इस पर किसी भी हमले का सीधा असर देश के पावर ग्रिड, निर्यात और पूरी आर्थिक व्यवस्था को ठप कर सकता है।
ईरान का पलटवार
इस हमले से बौखलाए ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर के LNG साइटों पर हमला बोल दिया है। ईरान का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम में कतर की भी भूमिका हो सकती है। हालांकि, अमेरिका के सहयोगी देशों—UAE, कतर और ओमान—ने पार्स गैस फील्ड पर हुए इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया है।
ट्रंप का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ते तनाव के बीच एक कड़ा बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अमेरिका को इजरायल द्वारा ईरान की प्रमुख फैसिलिटी पर किए गए इस बड़े हमले की पूर्व जानकारी नहीं थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस घटनाक्रम में कतर किसी भी तरह से शामिल नहीं था और ईरान द्वारा कतर की गैस सुविधा को निशाना बनाना एक अनुचित और गलत कार्य है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की ओर से आश्वासन दिया है कि अब पार्स गैस फील्ड पर और हमले नहीं किए जाएंगे, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने ईरान के सामने एक ‘बड़ी शर्त’ भी रख दी है। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान दोबारा कतर पर हमला करने का ‘मूर्खतापूर्ण निर्णय’ लेता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को ऐसी ताकत से उड़ा देगा जिसे ईरान ने पहले कभी नहीं देखा होगा। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि हालांकि वह इस स्तर का विनाश नहीं चाहते, लेकिन यदि कतर पर फिर से आंच आई तो वह कड़ी कार्रवाई करने में बिल्कुल संकोच नहीं करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह ऊर्जा युद्ध और आगे बढ़ा, तो वैश्विक स्तर पर गैस और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या वह ट्रंप की चेतावनी के बाद पीछे हटेगा या मिडिल ईस्ट की यह आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगी?
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