
यूनिक समय, नई दिल्ली। स्कूली शिक्षा और न्यायपालिका की गरिमा से जुड़े एक बेहद गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि NCERT (एनसीईआरटी) को अब सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की व्यापक समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका के खिलाफ प्रकाशित ‘आपत्तिजनक सामग्री’ के बाद उठाया गया है।
विशेषज्ञ कमेटी और बड़े बदलाव का भरोसा
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि पाठ्यक्रम की गहन जांच और समीक्षा के लिए केवल सरकारी निर्देश तक ही सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि इसके लिए डोमेन विशेषज्ञों (Domain Experts) का एक उच्च स्तरीय पैनल गठित किया जाएगा।
इस गंभीर चूक की जिम्मेदारी लेते हुए एनसीईआरटी के डायरेक्टर ने अदालत में हलफनामा पेश कर बिना शर्त माफी मांग ली है और संस्था की साख बहाल करने का भरोसा दिलाया है। सरकार ने कोर्ट को यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एनसीईआरटी में बड़े संरचनात्मक बदलाव शुरू कर दिए गए हैं, जिसके तहत अब विशेषज्ञों की अनिवार्य मंजूरी के बिना किसी भी नई सामग्री का प्रकाशन नहीं किया जा सकेगा।
कोर्ट की सलाह
बेंच ने टिप्पणी की कि एनसीईआरटी को केवल निर्देश देने के बजाय, केंद्र सरकार द्वारा एक स्वतंत्र विशेषज्ञ कमेटी बनाना अधिक प्रभावी कदम होता। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के भविष्य (छात्रों) को पढ़ाया जाने वाला कंटेंट तथ्यात्मक रूप से सही हो और देश के लोकतांत्रिक संस्थानों के प्रति सम्मानजनक हो।
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