
यूनिक समय, नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग आजकल हर घर की जरूरत बन गई है। लोग अब न केवल कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक सामान, बल्कि सब्जियां, किराना और खाना तक घर बैठे मंगवा रहे हैं। इस डिजिटल युग में ई-कॉमर्स कंपनियों की संख्या और प्रभाव भी तेजी से बढ़ा है, लेकिन इनके द्वारा ग्राहकों को लुभाने के लिए इस्तेमाल की जा रही भ्रामक रणनीतियों को लेकर अब सरकार सख्त हो गई है।
केंद्र सरकार ने सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया है कि वे अपने वेबसाइट और मोबाइल ऐप्स से “डार्क पैटर्न्स” को हटाएं। ये ऐसे डिज़ाइन या तकनीक होती हैं जो उपभोक्ता को अनजाने में कुछ खरीदने, सब्सक्राइब करने या अतिरिक्त भुगतान करने के लिए प्रेरित करती हैं।
सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह के फेक ऑफर, झूठी डील्स, डराने वाले मैसेज या जबरन सब्सक्रिप्शन अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। कंपनियों को अपनी नीतियों में बदलाव करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म झूठे डिस्काउंट, फर्जी रिव्यू और “अभी खरीदो, नहीं तो चूक जाओगे” जैसे ट्रिक्स का इस्तेमाल कर ग्राहकों को गुमराह नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं, ग्राहक की बिना सहमति के कोई भी सेवा या सब्सक्रिप्शन चालू करना अब पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
सरकार ने ऑनलाइन शॉपिंग के लिए उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए 13 ऐसे ‘डार्क पैटर्न्स’ की सूची भी जारी की है, जिन्हें हटाना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम से ऑनलाइन खरीदारी अब अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद है।
यह फैसला ई-कॉमर्स उद्योग में ईमानदारी और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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