
यूनिक समय, नई दिल्ली। ओला इलेक्ट्रिक के शेयर इन दिनों चर्चा में हैं, और पिछले पाँच दिनों में ही इनकी कीमत में करीब 20% का उछाल आया है। सोमवार को तो यह 7% से ज्यादा बढ़कर ₹58 के आसपास पहुँच गया। अगस्त 2025 में जो शेयर ₹40 से भी नीचे था, वह सितंबर आते-आते लगभग ₹60 को छूने की तैयारी में है।
इस तेजी की मुख्य वजह है, ओला इलेक्ट्रिक को PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना के तहत मिली मान्यता। कंपनी की Gen 3 स्कूटर रेंज को यह सर्टिफिकेशन मिल गया है, जिसका मतलब है कि अब कंपनी को अपनी बिक्री पर 13% से 18% तक का फायदा मिलेगा। यह इंसेंटिव 2028 तक जारी रहेगा. इस राहत से कंपनी के खर्चे कम होंगे और मुनाफे की राह आसान हो जाएगी, यही वजह है कि निवेशक इस शेयर में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
कंपनी की रणनीति और भविष्य की योजनाएँ
ओला की Gen 3 स्कूटर रेंज उसकी कुल बिक्री में आधे से ज्यादा का योगदान करती है, और अब Gen 2 और Gen 3 दोनों को यह सर्टिफिकेशन मिल गया है, जिससे कारोबार में स्थिरता और मजबूती आने की उम्मीद है। कंपनी का मानना है कि इससे EBITDA (एबिटडा) स्तर पर सकारात्मक नतीजे हासिल करना आसान होगा।
हाल ही में ओला ने अपने ‘संकल्प’ कार्यक्रम में नए मॉडल भी पेश किए, जिनमें S1 Pro Sport, S1 Pro+ और Roadster X+ शामिल हैं। इन सभी मॉडलों में स्वदेशी तकनीक से बनी 4680 भारत सेल बैटरी का इस्तेमाल किया जाएगा। इन स्कूटर्स की कीमत ₹1.49 लाख से शुरू होकर ₹1.89 लाख तक है। इनकी डिलीवरी इस साल नवरात्र से और जनवरी 2026 से शुरू होने की उम्मीद है।
चुनौतियाँ और भविष्य का दृष्टिकोण
हालांकि, कंपनी के तिमाही नतीजे अभी भी उत्साहजनक नहीं हैं। जून 2025 की तिमाही में कंपनी को ₹428 करोड़ का घाटा हुआ और रेवेन्यू आधा होकर ₹828 करोड़ रह गया। इसके बावजूद, निवेशक निराश नहीं हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हालात सुधरेंगे।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी मौसम और इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के कारण ओला अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। कंपनी गीगाफैक्ट्री का विस्तार और खुद की बैटरी तकनीक पर भी काम कर रही है, जिससे चीन पर उसकी निर्भरता कम होगी और वह वैश्विक बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बन पाएगी। हाल ही में कुछ बड़ी निवेश कंपनियों, जैसे Mirae Asset और Helios Capital, ने भी ओला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
हालांकि, सभी विशेषज्ञ एकमत नहीं है। कुछ ने इसे बेचने की सलाह दी है, जबकि कुछ ‘होल्ड’ करने को कह रहे हैं। असली परीक्षा तो आने वाली तिमाहियों में होगी, जब कंपनी को अपने कैश-फ्लो और मुनाफे की क्षमता को साबित करना होगा।
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