Mon, Jun 8th, 2026
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पेंटागन ने भारत के साथ अमेरिका के संबंधों पर दी प्रतिक्रिया

by tanuja • February 14, 2024
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भारत के साथ अमेरिका के संबंधों पर बात करते हुए सबरीना सिंह ने बताया कि दोनों देशों के बीच संचार और सैन्य संबंध बहुत अच्छे हैं। उन्होंने पाकिस्तान चुनाव पर कहा कि अमेरिका इस मामले में नजर बनाए हुए है।

पेंटागन की उप प्रेस सचिव सबरीना सिंह ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि भारत-अमेरिका के बीच सैन्य से सैन्य संबंध और अच्छे संचार है। उन्होंने कहा कि भारत में जो भी कुछ हो रहा है अमेरिका इस पर नजर बनाए रखेगा। पाकिस्तान चुनावी नतीजों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी है।

भारत के साथ अमेरिका के संबंधों पर बात करते हुए सबरीना सिंह ने कहा, ‘भारत के साथ हमारे सैन्य संबंध और संचार बहुत अच्छे हैं। हम इस बात पर नजर रखना जारी रखेंगे कि क्षेत्र में क्या हो रहा है। लेकिन मेरे पास फिलहाल इसे लेकर ज्यादा अपडेट नहीं है।’

भारत के किसी शीर्ष अधिकारी का अमेरिकी दौरे पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘मेरे पास फिलहाल भारत सरकार की तरफ से कोई जानकारी नहीं है। मैं इंटरजेंसी के अन्य अधिकारियों के बारे में बात नहीं कर सकती।’

पाकिस्तान में आठ फरवरी को चुनाव के बाद उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों पर सबरीना ने कहा, ‘वहां क्या हो रहा है हम इस पर नजर बनाए हुए हैं। भारत और पाकिस्तान के साथ सैन्य संबंधों पर सबरीना का बयान तब आया जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे अमेरिका में चार दिन की आधिकारिक दौरे पर पहुंचे।’

उनके दौरे पर विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में बताया गया कि जनरल मनोज पांडे अपनी यात्रा के दौरान, सीओएएस जनरल रैंडी जॉर्ज, यूनाइटेड स्टेट्स चीफ ऑफ स्टाफ ऑफ आर्मी (सीएसए) और अन्य वरिष्ठ सैन्य नेताओं के साथ उच्च स्तरीय चर्चा और बातचीत में शामिल होंगे।

भारतीय सेना में परिवर्तन, वैश्विक खतरे की धारणा, सेना में परिवर्तन-2030/2040, मानव संसाधन चुनौतियां, भविष्य की सेना का विकास और आधुनिकीकरण, और सह-उत्पादन और सह-विकास पहल जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका सेनाओं के बीच अंतर्दृष्टि, विचार और प्रथाओं को साझा करना है।

हाल ही में अमेरिकी एनएसए जनरल रैंडी जॉर्ज ने इंडो-पैसिफिक आर्मी चीफ्स कॉन्फ्रेंस (आईपीएसीसी) के लिए भारत का दौरा किया। इसे भारतीय सेना और अमेरिकी सेना द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में 18 सेनाओं के प्रमुखों और 12 देशों के प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने भाग लिया

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