
यूनिक समय, नई दिल्ली। पंजाब सरकार ने राज्य में धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘पंजाब पवित्र ग्रंथों के खिलाफ अपराध रोकथाम विधेयक-2025’ को मंजूरी दे दी गई है। यह विधेयक धार्मिक ग्रंथों जैसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब, भगवद गीता, बाइबल और कुरान शरीफ आदि की बेअदबी करने वालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति इन धार्मिक ग्रंथों का जानबूझकर अपमान करता है, तो उसे 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति इस अपराध को अंजाम देने का प्रयास करता है या किसी को उकसाता है, तो उसे 3 से 5 साल तक की सजा हो सकती है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि हाल के वर्षों में पवित्र ग्रंथों की बेअदबी की घटनाओं से समाज में असंतोष और तनाव की स्थिति बनी है। मौजूदा कानूनी प्रावधान ऐसे मामलों में पर्याप्त सजा सुनिश्चित नहीं कर पा रहे थे, जिससे अपराधी आसानी से बच निकलते थे। इसी कमी को दूर करने के लिए यह विशेष कानून लाया गया है।
सरकार का मानना है कि यह कानून धार्मिक सौहार्द, सामाजिक शांति और समुदायों के बीच भाईचारे को मजबूत करेगा। साथ ही इससे राज्य में कानून व्यवस्था और सहिष्णुता को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ क्रशर यूनिट्स एंड स्टॉकिस्ट्स एंड रिटेलर रूल्स-2025’ को भी मंजूरी दी है। इस नियमावली का उद्देश्य रेत-बजरी के अवैध खनन और बिक्री पर नियंत्रण स्थापित करना है। यह नीति क्रशर यूनिट्स और सामग्री विक्रेताओं की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।
नई व्यवस्था के तहत खनन और व्यापार की प्रक्रिया को पर्यावरण के अनुकूल और कानूनी दायरे में लाया जाएगा, जिससे रॉयल्टी चोरी और अवैध गतिविधियों पर रोक लग सकेगी।
इस दोहरे फैसले से जहां धार्मिक आस्था की सुरक्षा होगी, वहीं राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की भी रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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