
यूनिक समय, नई दिल्ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता में ‘प्रगति’ (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) मॉडल को नए भारत की कार्यसंस्कृति का आधार स्तंभ बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल परियोजनाओं की समीक्षा का मंच नहीं है, बल्कि सुशासन का वह मॉडल है जिसने उत्तर प्रदेश को एक ‘बॉटलनेक स्टेट’ (बाधाओं वाला राज्य) से निकालकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ (सफलताओं वाला राज्य) में बदल दिया है।
गुजरात के ‘स्वागत’ से ‘प्रगति’ का राष्ट्रीय सफर
मुख्यमंत्री ने इस मॉडल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि इसकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2003 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ‘स्वागत’ (SWAGAT) पोर्टल के रूप में रखी थी। 2014 के बाद इसे राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रगति’ के रूप में सुदृढ़ किया गया। आज यह डिजिटल गवर्नेंस और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म (सहकारी संघवाद) का सबसे सशक्त उदाहरण है, जहाँ तकनीक और जवाबदेही के माध्यम से जटिल समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाता है।
प्रमुख उपलब्धियां और कनेक्टिविटी का जाल
मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ आंकड़ों को प्रस्तुत करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश आज देश के इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ इंजन का नेतृत्व कर रहा है। वर्तमान में यूपी के पास ₹10.48 लाख करोड़ की लागत वाली 330 परियोजनाओं का विशाल पोर्टफोलियो है, जो देश में सर्वाधिक है। इनमें से ₹2.37 लाख करोड़ की 128 परियोजनाएं (39%) पूर्ण होकर शुरू हो चुकी हैं, जबकि ₹8.11 लाख करोड़ की 202 परियोजनाएं समय-सीमा के भीतर युद्ध स्तर पर चल रही हैं। प्रगति के तहत ₹4.19 लाख करोड़ के 65 मेगा प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिनमें से 26 कमीशन हो चुके हैं।
सीएम योगी ने कहा कि ‘प्रगति’ ने शासन की फाइल-केंद्रित संस्कृति को फील्ड-आधारित परिणामों में बदल दिया है। प्रदेश में प्रगति पोर्टल के माध्यम से 287 मुद्दों में से 278 (97%) का सफल समाधान किया गया है। राजस्व, वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर विकास जैसे विभागों की बाधाओं को एक ही मंच पर बैठकर दूर किया जा रहा है। पहले परियोजनाओं में देरी से निवेशक दूसरे राज्यों का रुख करते थे, लेकिन अब ‘प्रगति’ की वजह से वर्षों की प्रक्रिया दिनों में पूरी हो रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश अब एक्सप्रेस-वे नेटवर्क, देश के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क, सर्वाधिक मेट्रो शहरों और बेहतरीन एयर कनेक्टिविटी वाला राज्य बन चुका है। देश की पहली रैपिड रेल, अंतर्देशीय जलमार्ग और रोपवे जैसे प्रोजेक्ट्स इसके प्रमाण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब चर्चा ‘समस्या’ पर नहीं बल्कि सीधे ‘समाधान’ पर होती है।
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