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नई दिल्ली। आज से संसद के विशेष सत्र (Parliament special session) की शुरुआत होगी। सत्र की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा में भाषण से होगी। इस भाषण पर पक्ष और विपक्ष सबकी नजर टिकी है। इस सत्र की शुरुआत इन अटकलों के साथ हो रही है कि सरकार कोई आश्चर्यजनक कदम उठाएगी या नहीं।
पीएम ने कहा, “इस सदन पर आतंकी हमला हुआ। यह हमला एक इमारत पर नहीं था। यह हमारी जीवआत्मा पर था। देश इस घटना को भूल नहीं सकता। सदन को बचाने के लिए जिन्होंने अपने सीने पर गोलियां झेली उन्हें नमन करता हूं। वे आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उन्होंने बहुत बड़ी रक्षा की है।”
पीएम ने कहा, “आजादी के बाद लोगों ने तरह-तरह की आशंकाएं जताई थी। कहा था कि ये देश चल पाएगा या नहीं, लोकतंत्र रह पाएगा या नहीं। इस संसद ने विश्व को गलत साबित किया। इसी संसद में संविधान सभा की बैठकें हुईं। इन 75 वर्षों में सबसे बड़ी जो उपलब्धी है वो है देश के सामान्य लोगों का इस संसद पर विश्वास बढ़ता गया। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत यही है कि लोगों का इस व्यवस्था के प्रति विश्वास बना रहे।”
नरेंद्र मोदी ने कहा, “हम कभी संसद से कड़वाहट पालकर नहीं जाते। यहां परिवार वाला भाव है। अनेक संकटों के बाद भी सांसद सदन में आए हैं। ऐसी अनेक घटनाएं हुईं हैं। गंभीर बीमारियों के बाद भी व्हिलचेयर पर बैठकर आना पड़ा। सांसदों ने ऐसी भूमिका निभाई। कोरोना काल में भी हमारे सांसद दोनों सदन में आए। हमने राष्ट्र का काम रुकने नहीं दिया। संसद से ऐसा जुड़ाव है कि लोग सेंट्रल हॉल आते रहते हैं।”
पीएम ने कहा, “मैं पहली बार संसद का सदस्य बना और पहली बार एक सांसद के रूप में इस भवन में प्रवेश किया तो सहज रूप से इस संसद के दरवाजे पर सिर झुकाकर इस लोकतंत्र के मंदिर में कदम रखा था। मैं कल्पणा नहीं कर सकता था। भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि रेलवे प्लेटफॉर्म पर गुजारा करने वाला एक गरीब परिवार का बच्चा संसद में पहुंच सकता है। मैंने कभी कल्पणा नहीं की थी देश इतना प्यार देगा।”
पीएम मोदी ने कहा, “इस सदन से विदा लेना भावुक पल है। जब हम इस सदन को छोड़कर जा रहे हैं तो हमारा मन अनेक यादों और खट्टे-मिठे अनुभवों से भरा हुआ है। कभी संघर्ष तो कभी उत्साह और उमंग का माहौल रहा। ये हमारी साझी विरासत है। इसका गौरव भी हम सबका साझा है। आजाद भारत के नव निर्माण से जुड़े अनेक घटनाएं इन 75 वर्ष में इसी सदन में आकार लेती हमने देखी है।”
पीएम ने कहा, “भारत इस बात का गर्व करेगा कि जब भारत अध्यक्ष था तब अफ्रीकन यूनियन जी20 का सदस्य बना। अफ्रीकन यूनियन के अध्यक्ष ने उस पल को याद करते हुए कहा है कि वह रोने-रोने को हो गए थे। भारत के प्रति शक करने की सोच कई लोगों में है। कुछ लोग कह रहे थे कि घोषणा पर सहमति नहीं होगी, लेकिन वह हुआ। भारत की अध्यक्षता नवंबर के आखिर तक है। आज भारत विश्व मित्र के रूप में सामने आया है।”
पीएम ने कहा, “चंद्रयान तीन की सफलता से पूरा देश अभिभूत है। इसने भारत के सामर्थ्य का एक नया रूप जो आधुनिकता, विज्ञान और टेक्नोलॉजी से जुड़ा है लाया है। इसने दुनिया पर प्रभाव डाला है। मैं इसके लिए वैज्ञानिकों को बधाई देता हूं। जी20 की सफलता 140 देशवासियों की सफलता है। यह किसी व्यक्ति या दल की नहीं है। 60 से अधिक जगहों पर 200 से अधिक बैठकें हुईं। ये प्रभाव पूरे विश्व के मन पर पड़ा है।”
नरेंद्र ने संसद में कहा, “देश की 75 वर्षों की संसदीय यात्रा को फिर से याद करने के लिए और नए सदन में जाने के लिए उन प्रेरक पलों को इतिहास की महत्वपूर्ण घड़ी को याद करने का ये अवसर है। हम सब इस ऐतिहासिक भवन से विदा ले रहे हैं। आजादी के पहले ये सदन इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल था। आजादी के बाद इसे संसद भवन के रूप में पहचान मिली। इस इमारत के निर्माण का फैसला भले विदेशी शासकों का था, लेकिन हम गर्व से कह सकते हैं कि इस भवन के निर्माण में पसीना मेरे देशवासियों का लगा था।”
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने जी20 शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए पूरे देश को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इसने वैश्विक स्तर पर देश की नेतृत्व की क्षमता को नया आयाम दिया है।
संसद के विशेष सत्र की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में मौजूद हैं। लोकसभा में सत्र की शुरुआत के साथ ही हंगामा शुरू हो गया। अध्यक्ष हंगामा शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा कि जो टेक्निकल गलती हुई है उसकी वे जांच कराएंगे।
नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं सभी सांसदों से आग्रह करना चाहता हूं कि छोटा सत्र है। इसमें वे ज्यादा से ज्यादा समय दें। रोने-धोने के लिए बहुत समय होता है। बाद में करते रहिए। जीवन में कुछ ऐसे पल भी होते हैं जो उमंग और विश्वास से भर देते हैं। मैं आशा करता हूं कि पुरानी बुराइयों को छोड़कर अच्छाइयों को साथ लेकर नए सदन में प्रवेश करेंगे। ये प्रण सभी सांसद लेकर चलें। कल गणेश चतुर्थी का पावन पर्व है। गणेश जी विघ्नहर्ता माने जाते हैं। भारत के विकास यात्रा में कोई विघ्न नहीं रहेगा। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन नव प्रस्थान नए भारत के सपनों को साकार करने वाला बनेगा। इसलिए ये सत्र छोटा है, लेकिन बहुत मूल्यवान है।”
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