Rupee vs Dollar: 92.00 के ‘ऑल-टाइम लो’ पर पहुंचा भारतीय रुपया; ट्रंप के टैरिफ और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन

Indian rupee reached an all-time low of 92.00

यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गुरुवार का दिन चुनौतियों भरा रहा। विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.00 पर फिसल गया। वैश्विक स्तर पर डॉलर की बढ़ती मांग, भू-राजनीतिक तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के दोहरे प्रहार ने रुपये की कमर तोड़ दी है।

गिरावट के पीछे के बड़े कारण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय निर्यात पर भारी टैरिफ लगाए जाने के बाद से रुपया लगभग 5% तक गिर चुका है। इस साल अब तक कुल गिरावट 2% के करीब रही है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2026 की पहली बैठक में ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने डॉलर इंडेक्स को मजबूती दी, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं (Emerging Markets) की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया।

ईरान पर अमेरिकी कार्रवाई की चेतावनी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह 4% से ज्यादा की तेजी आई है। भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये की कमजोरी के रूप में दिखता है।

बाजार का ताजा हाल

इंटरबैंक मार्केट में रुपया 91.95 पर खुलने के बाद भारी दबाव के चलते देखते ही देखते 92.00 के ऐतिहासिक निचले स्तर को छू गया, जबकि इससे पिछले दिन बुधवार को यह 91.99 पर बंद हुआ था। रुपये की इस रिकॉर्ड कमजोरी का सीधा असर घरेलू शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया, जहाँ शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 343 अंक गिरकर 82,001.01 पर आ गया और निफ्टी 94 अंकों की गिरावट के साथ 25,248.55 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि 92.00 का स्तर एक महत्वपूर्ण तकनीकी मनोवैज्ञानिक बाधा है। सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के अमित पाबरी के अनुसार, यदि यह स्तर स्थायी रूप से टूटता है, तो रुपया 92.50 तक जा सकता है। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में हस्तक्षेप कर डॉलर की आपूर्ति बढ़ा सकता है, जिससे रुपया वापस 91.00 के स्तर पर आ सकता है।

औद्योगिक उत्पादन में ‘सुपर जंप’

रुपये की गिरावट के बीच एक सकारात्मक खबर आर्थिक मोर्चे से आई है। दिसंबर 2025 में भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) में 7.8 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। यह पिछले दो वर्षों का उच्चतम स्तर है, जो विनिर्माण (Manufacturing) और खनन क्षेत्रों में मजबूती को दर्शाता है।

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