
यूनिक समय, मथुरा। उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित कानूनी विवाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण में शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस अविनाश सक्सेना की एकल पीठ के समक्ष हुई इस कार्यवाही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपना पक्ष रखने के लिए और समय की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए दो सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है।
ASI की रिपोर्ट पर टिका मामला
सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के अधिवक्ता और प्रमुख पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचा कि मुकदमा संख्या-3 में एएसआई ने अभी तक अपनी रिपोर्ट और जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर एएसआई के प्रतिनिधियों ने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें दस्तावेजी साक्ष्य और विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय चाहिए। अदालत ने इसे स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि अब अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
हाईकोर्ट ने मामले में लंबित अन्य प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई को फिलहाल रोक दिया है। इसके पीछे की मुख्य वजह 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अहम सुनवाई है।
सुप्रीम कोर्ट 16 फरवरी को इस बात पर फैसला सुना सकता है कि यह मामला प्रतिनिधि वाद के रूप में चलेगा या नहीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत के निर्णय के बाद ही लंबित आवेदनों और आगे की कानूनी प्रक्रिया को दिशा दी जाएगी।
20 फरवरी को अगली सुनवाई
अब सभी पक्षों की नजरें 20 फरवरी पर टिकी हैं। यदि एएसआई अपना जवाब दाखिल कर देता है, तो मुकदमे की दिशा तय हो सकती है। हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण प्राचीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़कर किया गया है, जबकि मुस्लिम पक्ष इन दावों को खारिज करते हुए प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का हवाला दे रहा है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी इस कानूनी घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इस फैसले का असर राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
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