
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक क्रांतिकारी विजन साझा किया है। सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘गन्ना आधारित अंतःफसली खेती’ (Intercropping) सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मॉडल किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है।
क्यों जरूरी है ‘अंतःफसली खेती’ मॉडल?
उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य को बदलने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘अंतःफसली खेती’ (Intercropping) मॉडल की आवश्यकता पर विशेष बल दिया है। मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा कि प्रदेश में अब कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार संभव नहीं है, इसलिए राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इकाई क्षेत्रफल (प्रति एकड़) से अधिक फसल पैदा करना ही बचा है।
गन्ना + दलहन/तिलहन के इस नए मॉडल की कई महत्वपूर्ण खासियतें हैं जो किसानों के लिए वरदान साबित होंगी। इस पद्धति के तहत, गन्ने की मुख्य फसल के बीच उपलब्ध खाली जगह का कुशल उपयोग करके सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलें उगाई जाएंगी, जिससे कुल कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि होगी।
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक ही सिंचाई और खाद प्रबंधन के भीतर दो फसलें तैयार हो जाती हैं, जिससे खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और शुद्ध लाभ बढ़ जाता है। इसके अलावा, यह प्रणाली किसानों को पूरे वर्ष स्थिर नकदी प्रवाह (Cash Flow) प्रदान करती है, जिससे उनकी केवल गन्ने के भुगतान पर निर्भरता कम होगी और उन्हें समय-समय पर आर्थिक संबल मिलता रहेगा।
मिशन 2030: पांच साल का मास्टर प्लान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य को संवारने के लिए ‘मिशन 2030’ के तहत एक विस्तृत पांच साल का मास्टर प्लान तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में पूरे प्रदेश में लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं, ताकि कृषि विकास की गति को समयबद्ध तरीके से बढ़ाया जा सके।
इस योजना का लक्ष्य अत्यंत विशाल है, क्योंकि वर्तमान में उत्तर प्रदेश के लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर के विस्तृत क्षेत्र में गन्ने की खेती की जाती है। इतने बड़े रकबे में गन्ने के साथ दलहन और तिलहन की फसलों को जोड़ने से न केवल उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि खाद्य तेल और दालों के उत्पादन में भारत की वैश्विक आत्मनिर्भरता को भी एक नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
इस पूरे मिशन को पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर संचालित किया जाएगा, जिसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों को मिट्टी की गुणवत्ता के अनुसार उपयुक्त फसलों के चयन का निर्देश दिया गया है। वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार, रबी के सीजन में सरसों और मसूर की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि जायद के सीजन में उर्द और मूंग जैसी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि भूमि की उर्वरता और किसानों का मुनाफा दोनों बढ़ सकें।
किसानों को मिलेगा अनुदान और सुरक्षा
योगी सरकार की इस नई पहल के तहत किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक पारदर्शी ‘अनुदान ढांचा’ और स्पष्ट वर्षवार रोडमैप तैयार करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मॉडल की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि गन्ने की मुख्य पैदावार को प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल प्राप्त करना और किसानों को अतिरिक्त सुरक्षा देना ही इस योजना की सबसे बड़ी ताकत है।
उनके अनुसार, यह पद्धति ‘एकल फसल’ (Single Crop) पर निर्भरता के कारण होने वाले आर्थिक जोखिम को काफी हद तक कम कर देगी, जिससे प्रदेश की कृषि व्यवस्था पहले से कहीं अधिक स्थिर और टिकाऊ बनेगी। यह दूरदर्शी योजना न केवल ग्रामीण इलाकों में किसानों की निजी आर्थिक स्थिति में सुधार लाएगी, बल्कि बड़े पैमाने पर राज्य के सकल मूल्य वर्धित (GVA) में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देकर उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Leave a Reply