
यूनिक समय, मथुरा। इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से एक नए अध्याय का साक्षी बनने जा रहा है क्योंकि 15 फरवरी को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा से पहली बार बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ के लिए विशेष ‘नेग’ और विवाह का शगुन भेजा जाएगा। शास्त्रों में वर्णित ‘हरि-हर’ की एकात्मकता को जीवंत करते हुए भगवान कृष्ण अपने आराध्य और मित्र महादेव को उनके विवाह पर दिव्य उपहार भेंट करेंगे जिसमें बाबा के विवाह के विशेष वस्त्र, शृंगार सामग्री, ब्रज के प्रसिद्ध लड्डू, मिठाइयां, पंचमेवा, फल-फूल और धातु के पात्र शामिल होंगे। इस ऐतिहासिक मंगल यात्रा की शुरुआत 8 फरवरी रविवार को मथुरा में सूर्योदय के ठीक बाद एक सजी हुई ट्रक के माध्यम से होगी जिसे ब्रजवासी पुष्पवर्षा कर वाराणसी के लिए विदा करेंगे और यह सौगात 9 फरवरी को काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी।
यह भव्य आयोजन श्रीकाशी विश्वनाथ ट्रस्ट और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के बीच हुए एक विशेष समझौते का हिस्सा है जिसके तहत पिछले साल से ही दोनों पवित्र धामों के बीच उपहारों के आदान-प्रदान की नई परंपरा शुरू की गई है। इससे पूर्व रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ धाम और श्रीकृष्ण जन्मस्थान के बीच गुलाल और भस्म जैसी पवित्र वस्तुओं का आदान-प्रदान किया गया था लेकिन यह पहला अवसर है जब महाशिवरात्रि पर विवाह के शगुन के रूप में इतनी विस्तृत भेंट भेजी जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण ने स्वयं महादेव को प्रसन्न करने के लिए हिमालय पर पाशुपत व्रत किया था जिसका उल्लेख शिव पुराण और महाभारत के अनुशासन पर्व में मिलता है और यही भक्ति भाव आज इस आधुनिक परंपरा के रूप में फलीभूत हो रहा है।
महाशिवरात्रि के इस उत्सव में एक और विशेष कड़ी महाराष्ट्र के नासिक स्थित ज्योतिर्लिंग त्र्यंबकेश्वर से जुड़ने जा रही है जहाँ से बाबा विश्वनाथ के लिए शगुन की हल्दी मंगाई गई है। आगामी 13 फरवरी को टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास पर बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा पर यह हल्दी अर्पित की जाएगी जिसे नासिक के त्र्यंबकेश्वर से पारंपरिक तरीके से काशी लाया जाएगा। काशी शिव बारात समिति और स्थानीय विद्वानों के नेतृत्व में होने वाले इस अनुष्ठान में वसंत पंचमी से ही उत्सवों की शृंखला शुरू हो चुकी है जो 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन बाबा के दिव्य विवाह और शृंगार के साथ अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंचेगी।
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