
यूनिक समय, नई दिल्ली। अगर आप शनिवार, 7 फरवरी को कहीं जाने के लिए कैब या ऑटो बुक करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। देशभर में ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े लाखों ड्राइवरों ने ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ का एलान किया है। इस देशव्यापी हड़ताल के कारण शनिवार को कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाएं पूरी तरह ठप रहने की आशंका है। ड्राइवरों ने एकजुट होकर अपने मोबाइल एप बंद रखने का फैसला किया है, जिसका सीधा असर दफ्तर जाने वालों और यात्रियों पर पड़ेगा।
क्यों हो रही है यह महा-हड़ताल?
इस आंदोलन का नेतृत्व तेलंगाना गिग वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और अन्य प्रमुख संगठनों द्वारा किया जा रहा है। ड्राइवरों का आरोप है कि कंपनियां मनमाना कमीशन काट रही हैं और उनके लिए कोई निश्चित किराया तय नहीं है। बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों के बीच कम कमाई ने उनके घर चलाना मुश्किल कर दिया है।
यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मांग की है कि ड्राइवरों के साथ बातचीत कर एक न्यूनतम रेट (Base Fare) तय किया जाए।कमर्शियल इस्तेमाल के लिए सफेद नंबर प्लेट (प्राइवेट गाड़ियों) के प्रयोग पर पूरी तरह पाबंदी लगाने की मांग की गई है, क्योंकि इससे रजिस्टर्ड टैक्सी ड्राइवरों के काम पर बुरा असर पड़ रहा है।
यात्रियों पर क्या होगा असर?
हड़ताल के चलते शनिवार को आपको अपने मोबाइल स्क्रीन पर ‘No Cabs Available’ का मैसेज दिख सकता है। यदि इक्का-दुक्का गाड़ियां उपलब्ध भी हुईं, तो ‘पीक आवर्स’ के कारण किराया सामान्य से 2 से 3 गुना अधिक वसूला जा सकता है।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे शनिवार को अपनी यात्रा के लिए मेट्रो, स्थानीय बसों या निजी वाहनों का उपयोग करें।
विरोध का पुराना सिलसिला
यह कोई पहली बार नहीं है जब गिग वर्कर्स सड़कों पर उतरे हैं। इससे पहले 3 फरवरी 2026 को भी सुरक्षा और बेहतर वेतन को लेकर प्रदर्शन हुआ था। वर्ष 2025 में भी दिसंबर के अंत में करीब 50,000 वर्कर्स ने काम बंद किया था। ड्राइवरों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस कानून नहीं बनाती, ’10 मिनट डिलीवरी’ जैसे दबावपूर्ण सिस्टम और कंपनियों की मनमानी के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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