Fri, Jun 5th, 2026
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Ghooskhor Pandat Controversy: FIR और दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका के बाद मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे ने तोड़ी चुप्पी

by Tarun Bhardwaj • February 6, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। नेटफ्लिक्स की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ रिलीज से पहले ही कानूनी और सामाजिक विवादों के भंवर में फंस गई है। फिल्म के शीर्षक में ‘पंडित’ शब्द के साथ ‘घूसखोर’ विशेषण जोड़ने पर ब्राह्मण समाज और विभिन्न संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक जा पहुंचा है और लखनऊ में निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। बढ़ते दबाव को देखते हुए अब फिल्म के मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी और निर्देशक नीरज पांडे ने सार्वजनिक सफाई जारी की है।

मनोज बाजपेयी का भावुक नोट

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्गज अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक भावुक नोट साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक कलाकार के तौर पर उनका उद्देश्य केवल एक कमजोर इंसान की आत्म-पहचान की यात्रा को पर्दे पर उतारना था। मनोज ने लिखा “मैं लोगों की भावनाओं और चिंताओं को गंभीरता से लेता हूं। मेरा मकसद किसी समुदाय विशेष पर टिप्पणी करना नहीं था।” “यह फिल्म एक व्यक्ति के संघर्ष की कहानी है। नीरज पांडे के साथ काम करते हुए मैंने हमेशा उनकी फिल्मों में गंभीरता और संवेदनशीलता देखी है।” अभिनेता ने जानकारी दी कि लोगों की नाराजगी को देखते हुए मेकर्स ने फिलहाल फिल्म का सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला किया है।

निर्देशक नीरज पांडे का पक्ष

फिल्म के निर्देशक नीरज पांडे ने भी एक लंबा नोट लिखकर अपनी मंशा साफ की। उन्होंने बताया कि ‘पंडित’ शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक पुलिस अधिकारी (कॉप ड्रामा) के बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है। कहानी व्यक्ति के कर्मों पर आधारित है, न कि किसी जाति या धर्म के प्रतिनिधित्व पर। नीरज पांडे ने अपील की कि फिल्म को उसके पूरे संदर्भ में देखा जाना चाहिए। केवल एक टाइटल या छोटे क्लिप के आधार पर इसे जज करना सही नहीं है। उन्होंने दोहराया कि उनका काम हमेशा जिम्मेदारी और सम्मान के साथ कहानियों को पेश करना रहा है।

कानूनी शिकंजा और बैन की मांग

फिल्म के शीर्षक को लेकर न केवल बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रतिबंध की मांग की है, बल्कि फिल्ममेकर्स काउंसिल (FMC) ने भी नेटफ्लिक्स और मेकर्स को नोटिस भेज दिया है। लखनऊ पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक जातिगत विद्वेष फैलाने और सार्वजनिक सौहार्द बिगाड़ने का काम कर रहा है। दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका में भी फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की गुहार लगाई गई है।

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