यूनिक समय, नई दिल्ली। क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' जैसी चर्चित फिल्मों के बीच मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) के चहेते सुपरहीरो टॉम हॉलैंड एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आए हैं। डेस्टिन डैनियल क्रेटन के निर्देशन में बनी मच-अवेटेड फिल्म 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' 30 जुलाई 2026 को भारत सहित दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अगर आप 'नो वे होम' जैसा मल्टीवर्स वाला बड़ा तमाशा देखने की उम्मीद कर रहे हैं, तो यह फिल्म उससे थोड़ी अलग है; यह पीटर पार्कर के संघर्ष, अकेलेपन और उसकी इंसानी भावना को गहराई से पेश करती है। क्या है फिल्म की कहानी? फिल्म की कहानी 'नो वे होम' की घटनाओं के चार साल बाद से शुरू होती है। डॉक्टर स्ट्रेंज के मैजिक स्पेल के बाद पूरी दुनिया पीटर पार्कर (टॉम हॉलैंड) को भूल चुकी है। उसकी प्रेमिका एमजे (जेंडाया) और सबसे अच्छा दोस्त नेड (जैकब बैटलन) भी अब उसे नहीं पहचानते। पीटर न्यूयॉर्क के एक छोटे से अपार्टमेंट में अकेला रहता है और खुद को अपने करीबियों से दूर रखकर पूरी जिंदगी स्पाइडर-मैन बनकर लोगों की मदद में लगा देता है। इसी बीच डैमेज कंट्रोल सेंटर पर बार-बार हमले होने लगते हैं और न्यूयॉर्क पर मैक गार्गन उर्फ स्कॉर्पियन का खतरा मंडराने लगता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब हल्क (मार्क रफेलो) और पनिशर (जॉन बर्नथल) जैसे ताकतवर किरदार भी इसका हिस्सा बनते हैं। एमजे की जान भी खतरे में आ जाती है, जिससे स्पाइडर-मैन को एक बेहद खतरनाक दुश्मन से निपटना पड़ता है। अभिनय और मुख्य किरदार फिल्म में अभिनय और मुख्य किरदारों की बात करें तो टॉम हॉलैंड इस मूवी की सबसे बड़ी ताकत साबित हुए हैं। इस बार पर्दे पर उनका पीटर पार्कर का किरदार पहले से कहीं अधिक गंभीर, परिपक्व और अकेला नजर आता है, जिसे उन्होंने कम संवादों के बावजूद अपनी सशक्त बॉडी लैंग्वेज और आंखों के भावों से बेहद प्रभावी ढंग से निभाया है। सपोर्टिंग कास्ट की बात करें तो जेंडाया की भूमिका भले ही सीमित रही हो, लेकिन टॉम हॉलैंड के साथ उनके भावनात्मक दृश्य गहरा असर छोड़ते हैं। इसके अलावा जॉन बर्नथल पनिशर के रूप में कम स्क्रीन टाइम में भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं, वहीं मार्क रफेलो और सैडी सिंक की मौजूदगी पूरी कहानी को एक नया आयाम देती है। निर्देशन और तकनीकी पहलू निर्देशक डेस्टिन डेनियल क्रेटन ने केवल बड़े एक्शन और वीएफएक्स पर निर्भर रहने के बजाय पीटर पार्कर की इमोशनल जर्नी को संतुलित जगह दी है। फिल्म की शुरुआत काफी धमाकेदार है और वेब-स्विंगिंग सीक्वेंस रोमांच पैदा करते हैं। एक्शन कोरियोग्राफी केवल सीजीआई पर टिकी नहीं लगती और बैकग्राउंड स्कोर कहानी के मूड के साथ बेहतरीन तालमेल बनाता है। कमजोर कड़ियां करीब ढाई घंटे की यह फिल्म इंटरवल के बाद दूसरे हाफ में थोड़ी धीमी और लंबी महसूस होने लगती है। कई विरोधी और बड़े किरदार होने के कारण कुछ कैरेक्टर्स को पर्याप्त स्क्रीन टाइम नहीं मिल पाता। साथ ही, फिल्म का क्लाइमैक्स उतना चौंकाने वाला नहीं है जैसी फैंस को उम्मीद रहती है। देखें या न देखें? 'स्पाइडर-मैन: ब्रांड न्यू डे' हर मामले में परफेक्ट भले न हो, लेकिन यह याद दिलाती है कि पीटर पार्कर की असली ताकत उसकी सुपरपावर नहीं बल्कि उसका इंसानी जज्बा है। अगर आप स्पाइडर-मैन के इमोशनल और स्ट्रगलिंग फेज को देखना पसंद करते हैं, तो टॉम हॉलैंड की यह फिल्म आपको बड़े पर्दे पर निराश नहीं करेगी। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Ajinkya Rahane: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से किया संन्यास का ऐलान ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]