
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के दूसरे सत्र के माध्यम से देश भर के करोड़ों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधा संवाद किया। 9 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे आयोजित इस विशेष सत्र में पीएम मोदी ने न केवल परीक्षा के तनाव को दूर करने के उपाय बताए, बल्कि छात्रों को 2047 के ‘विकसित भारत’ का सारथी बनने के लिए भी प्रेरित किया। इस वर्ष कार्यक्रम ने अपनी लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिसमें 4.5 करोड़ से अधिक छात्रों ने पंजीकरण कराकर पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
अनुशासन और प्रेरणा का संतुलन
‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के दूसरे सत्र के दौरान जब एक छात्र ने अनुशासन और प्रेरणा (Motivation) के महत्व पर सवाल पूछा, तो प्रधानमंत्री ने बेहद सरल उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में अनुशासन सोने पर सुहागा का काम करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुशासन के कोई भी प्रेरणा केवल एक बोझ बनकर रह जाती है और अंततः निराशा पैदा करती है। जैसे एक किसान बिना खेत जोते फसल की उम्मीद नहीं कर सकता, वैसे ही बिना समयबद्ध अनुशासन के छात्र अपनी प्रतिभा का पूर्ण लाभ नहीं उठा सकते।
AI और टेक्नोलॉजी
आधुनिक दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डर को लेकर प्रधानमंत्री ने छात्रों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि हमें उसका उपयोग अपनी ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को आगाह किया कि वे मोबाइल या टीवी के गुलाम न बनें। पीएम ने कहा, “निर्णय लेने की शक्ति हमेशा आपके पास होनी चाहिए; टेक्नोलॉजी को एक गाइड की तरह इस्तेमाल करें, उसे अपना मालिक न बनने दें।”
विकसित भारत @2047 में छात्रों की भूमिका
पीएम मोदी ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि 10वीं और 12वीं के छात्रों के मन में भी विकसित भारत का सपना है। उन्होंने कहा कि विकसित देश बनने के लिए हमें अपनी व्यक्तिगत आदतों को बदलना होगा। “कहीं भी न थूकना, कूड़ा न फैलाना और थाली में अन्न न छोड़ना—ये छोटी-छोटी आदतें ही एक नागरिक के रूप में विकसित भारत में आपका सबसे बड़ा योगदान हैं।” उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं (Vocal for Local) को अपनाने पर भी जोर दिया।
परीक्षा तनाव और पैशन पर सलाह
परीक्षा के दौरान होने वाली घबराहट और रिवीजन न कर पाने के डर पर पीएम ने कहा कि शांत मन से परीक्षा दें और यह विश्वास रखें कि आपने जो पढ़ा है, वह आपके मस्तिष्क में संचित है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने कमजोर सहपाठियों को पढ़ाएं, जिससे उनका अपना विषय और अधिक स्पष्ट हो जाएगा। पैशन और पढ़ाई के बीच संतुलन पर उन्होंने कहा कि ये दोनों अलग नहीं हैं; कला और विज्ञान को एक-दूसरे के पूरक के रूप में इस्तेमाल कर पढ़ाई की थकान को मिटाया जा सकता है।
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