
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नवनिर्मित पीएमओ भवन ‘सेवा तीर्थ’ में हुई पहली कैबिनेट बैठक में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने दक्षिण भारतीय राज्य केरल का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘केरलम्’ (Keralam) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह कदम न केवल राज्य की भाषाई पहचान को सम्मान देता है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक मांग को भी पूरा करता है।
भाषा और संस्कृति की जीत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी साझा करते हुए बताया कि भाषा के आधार पर राज्यों के गठन के समय से ही केरल का नाम बदलने की मांग निरंतर की जा रही थी, जिसे अब आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। ‘केरलम्’ नाम दरअसल मलयालम भाषा और वहां की समृद्ध स्थानीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है क्योंकि स्थानीय निवासी अपनी मातृभाषा में राज्य को सदैव ‘केरलम्’ कहकर ही संबोधित करते आए हैं।
इस ऐतिहासिक निर्णय के पीछे एक व्यापक राजनीतिक सहमति भी रही है क्योंकि इसके लिए केरल विधानसभा ने जून 2024 में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था और सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी दलों व बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस सांस्कृतिक बदलाव की पुरजोर वकालत की थी।
संविधान की आठवीं अनुसूची में होगा बदलाव
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने केंद्र सरकार से यह विशेष आग्रह किया था कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी आधिकारिक भाषाओं में राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर अब ‘केरलम्’ कर दिया जाए। इस बदलाव की तकनीकी प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने अगस्त 2023 में भी एक प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दिए गए कुछ तकनीकी सुझावों और सुधारों के बाद केरल विधानसभा ने दोबारा संशोधित प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा।
केंद्रीय कैबिनेट की हालिया मंजूरी मिलने के बाद अब इस विधेयक को औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए पुनः राज्य विधानसभा भेजा जाएगा, जिसके पश्चात संवैधानिक संशोधन की आवश्यक कार्यवाही को अंतिम रूप दिया जाएगा।
केरल से केरलम् तक के ऐतिहासिक सफर की शुरुआत 1 जुलाई 1949 को हुई थी जब त्रावनकोर और कोचीन रियासतों का विलय करके ‘त्रावनकोर-कोचीन’ राज्य का गठन किया गया था। इसके बाद 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के प्रभाव में आने पर इसमें मालाबार क्षेत्र को जोड़ा गया और आधिकारिक तौर पर ‘केरल’ राज्य अस्तित्व में आया। वर्तमान में 24 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट द्वारा इस राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम्’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी देना इस यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुआ है।
यह महत्वपूर्ण फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब केरल में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और राजनीतिक विश्लेषक इसे सीधे तौर पर राज्य की क्षेत्रीय अस्मिता और भाषाई पहचान को सम्मान देने के रूप में देख रहे हैं। साथ ही नए पीएमओ भवन ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित मंत्रिमंडल की पहली बैठक ने यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि केंद्र सरकार जनभावनाओं और क्षेत्रीय गौरव को राष्ट्रीय नीतियों में प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है।
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