यूनिक समय, नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित 'फ्लोरिश स्टे' होटल में बुधवार सुबह हुए भीषण और दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। इस हादसे में 11 विदेशी नागरिकों समेत कुल 21 लोगों की असमय मौत हो गई थी। मामले के मुख्य आरोपी और होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर गुरुवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी भानु प्रताप सिंह की अदालत में पेश किया गया, जहां साकेत कोर्ट ने उसे चार दिन की पुलिस हिरासत (रिमांड) में भेज दिया है। दूसरी तरफ, हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) ने इस पूरे अग्निकांड की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। कोर्ट में पुलिस की दलील साकेत कोर्ट में पेशी के दौरान दिल्ली पुलिस ने आरोपी लवकेश बजाज से गहन पूछताछ, होटल के अन्य स्टाफ और जरूरी दस्तावेजों की बरामदगी के लिए चार दिनों की कस्टडी मांगी थी। पुलिस ने अदालत को बताया कि होटल स्टाफ के संबंध में अब तक केवल दो कर्मचारियों की ही सटीक जानकारी मिल सकी है, जबकि होटल का मैनेजर जय मिश्रा अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है, जिसकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। दूसरी ओर, आरोपी के वकील ने कोर्ट में दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने उन्हें अब तक प्राथमिकी (FIR) की कॉपी और गिरफ्तारी के ठोस आधार (Grounds of Arrest) की प्रति उपलब्ध नहीं कराई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए गिरफ्तारी को नियमों के खिलाफ बताया। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और आरोपी की गिरफ्तारी की सूचना उसकी पत्नी को समय पर दे दी गई थी, जिसके बाद अदालत ने पुलिस की रिमांड अर्जी को स्वीकार कर लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जाना घायलों का हाल हादसे के करीब 24 घंटे बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता साकेत स्थित मैक्स अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्होंने अग्निकांड में झुलसे और घायल हुए मरीजों से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम से घायलों के चल रहे इलाज की विस्तृत समीक्षा की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पीड़ितों को बेहतर से बेहतर इलाज मिलना चाहिए, जिसका पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। मुख्यमंत्री ने इस बेहद दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए बड़े मुआवजे का ऐलान किया है। इसके तहत इस भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के आश्रितों को ₹10 लाख की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि इस भीषण लापरवाही के लिए जो भी सरकारी अधिकारी या निजी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अस्पताल में भर्ती मरीजों की स्थिति और शवों का डीएनए टेस्ट मैक्स अस्पताल प्रशासन और बीजेपी विधायक सतीश उपाध्याय ने भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य को लेकर अहम जानकारी साझा की है। अस्पताल के अनुसार, फिलहाल वहां 15 मरीज उपचाराधीन हैं, जिनमें से 13 विदेशी नागरिक हैं। राहत की बात यह है कि वेंटिलेटर सपोर्ट पर मौजूद 6 मरीजों की हालत में अब धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है और वे पूरी तरह स्थिर हैं। अन्य 9 मरीज आईसीयू और सामान्य वार्ड में भर्ती हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, एक मरीज की रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) की सफल सर्जरी बुधवार को की गई थी, जिस पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर रखे हुए है और एक मरीज को जल्द ही डिस्चार्ज करने की योजना है। वहीं दूसरी ओर, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हादसे में मारे गए विदेशी नागरिकों के शव फिलहाल उनके परिजनों या दूतावास को नहीं सौंपे जाएंगे। चूंकि कई शव बुरी तरह झुलस चुके हैं, इसलिए पहचान सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की मानवीय चूक से बचने के लिए पहले सभी शवों की डीएनए प्रोफाइलिंग (DNA Profiling) कराई जाएगी। डीएनए मिलान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विदेश मंत्रालय के समन्वय से शवों को संबंधित देशों को सौंपा जाएगा। शॉर्ट सर्किट से भड़की थी आग दिल्ली पुलिस की प्रारंभिक जांच के सूत्रों से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि होटल में आग किसी गैस सिलेंडर के फटने से नहीं, बल्कि आंतरिक वायरिंग में हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। जांच के दौरान दमकल विभाग को होटल के कई कमरों में इलेक्ट्रॉनिक चूल्हे (इंडक्शन) और अन्य उपकरण मिले हैं। दरअसल, लंबे समय से रुके हुए पर्यटक इन कमरों में खुद खाना बनाने के लिए इन बिजली उपकरणों का उपयोग कर रहे थे, जिससे लोड बढ़ा। हालांकि, बेसमेंट और ऊपरी मंजिल पर चल रहे दो रसोईघरों में एलपीजी सिलेंडर मौजूद थे, लेकिन गनीमत रही कि उनमें कोई विस्फोट नहीं हुआ। अधिकतर मौतें तीसरी मंजिल और बेसमेंट में दम घुटने (धुएं के कारण) की वजह से हुईं। इस बीच, दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के पूर्व निदेशक अतुल गर्ग ने एक बड़ा बयान देकर दिल्ली नगर निगम (MCD) को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने बताया कि फायर विभाग केवल तभी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) या फायर सेफ्टी गाइडलाइंस जारी करता है जब एमसीडी या अन्य एजेंसियां मामला उनके पास भेजती हैं। मालवीय नगर के इस होटल की फाइल कभी भी फायर विभाग के पास भेजी ही नहीं गई। आवेदक ने कभी आवेदन नहीं किया और न ही एमसीडी ने इसे फॉरवर्ड किया। लाइसेंस जारी करने की प्राथमिक जिम्मेदारी एमसीडी की होती है, और चूंकि मामला कभी फायर विभाग के पास आया ही नहीं, इसलिए वहां कोई सुरक्षा निरीक्षण या सिफारिश नहीं की जा सकी थी। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Hyderabad Fire: अमीरपेट के ‘हेलमेट बाजार’ में आग लगने से मची अफरा-तफरी; 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