Braj Ki Holi: श्रीकृष्ण जन्मभूमि से बाबा विश्वनाथ के लिए रवाना हुई ‘गुलाल यात्रा’; सवा मन गुजिया और फाग के रंगों से महकेगी काशी

'Gulal Yatra' started from Shri Krishna Janmabhoomi for Baba Vishwanath

यूनिक समय, मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा औरबाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के बीच भक्ति का एक अद्भुत सेतु तैयार हो रहा है। रंगभरी एकादशी के पावन अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि से एक विशेष और भावनात्मक ‘गुलाल यात्रा’ वाराणसी के लिए रवाना हुई है। यह यात्रा केवल रंगों का मेल नहीं, बल्कि दो दिव्य धामों के आध्यात्मिक मिलन का प्रतीक है, जहाँ ब्रज की होली का आनंद अब काशी विश्वनाथ धाम की गलियों में बिखरेगा।

सवा मन गुजिया और दिव्य गुलाल का प्रसाद

भगवान शिव और श्रीकृष्ण के अटूट प्रेम को समर्पित इस विशेष गुलाल यात्रा में कान्हा के दरबार से बाबा विश्वनाथ के लिए सवा मन यानी लगभग 50 किलो शुद्ध और स्वादिष्ट गुजिया का प्रसाद भेंट स्वरूप भेजा गया है।

इस यात्रा में सवा मन गुजिया के साथ-साथ विशेष रंग-बिरंगा गुलाल, नील गुलाल, ताजे फल और सुगंधित पुष्प भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें वाराणसी पहुँचकर बाबा विश्वनाथ के चरणों में अत्यंत श्रद्धा के साथ अर्पित किया जाएगा।

ब्रज की प्राचीन और समृद्ध परंपरा के अनुसार होली के उत्सव का शुभारंभ महादेव को गुलाल अर्पित करके ही किया जाता है, जो वास्तव में ‘हरि-हर’ यानी भगवान विष्णु और भगवान शिव के एकत्व और उनके बीच के अगाध आध्यात्मिक संबंध को दर्शाता है।

काशी में गूँजेगी ब्रज की होरी और ढोल की थाप

मथुरा से काशी के लिए रवाना हुई इस पावन यात्रा के साथ ब्रज के सिद्ध कलाकारों का एक विशेष दल भी सम्मिलित है, जो काशी विश्वनाथ धाम के भव्य और दिव्य मंच पर अपनी अनुपम कला का प्रदर्शन करेंगे। ये कलाकार पारंपरिक होली गायन, वादन और शास्त्रीय फाग नृत्य के माध्यम से समस्त काशीवासियों को ब्रज की जीवंत और आनंदमयी होली का साक्षात अनुभव कराएंगे। ढोल की थाप और ‘आज बिरज में होरी रे रसिया’ जैसे सुरीले पदों की गूँज जब काशी की गलियों में फैलेगी, तब पूरा वातावरण भक्ति और उत्सव के रंग में सराबोर होकर भगवान कृष्ण और शिव के प्रेममय मिलन का साक्षी बनेगा।

रिश्तों की नई डोर

श्रीकृष्ण जन्मभूमि के सचिव कपिल शर्मा के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत पिछले वर्ष ही की गई थी ताकि दोनों पवित्र नगरों के बीच आध्यात्मिक संबंधों को और प्रगाढ़ किया जा सके। भक्तों का विश्वास है कि जब ब्रज का गुलाल बाबा के चरणों में चढ़ता है, तो यह प्रेम और भक्ति के उच्चतम शिखर का संगम होता है। यही कारण है कि इस अनूठी यात्रा को लेकर मथुरा और वाराणसी दोनों ही शहरों के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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