
यूनिक समय, नई दिल्ली। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के लिए कानूनी मोर्चे पर शनिवार को एक बड़ी जीत सामने आई है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने साल 2002 के चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बड़ी राहत देते हुए उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया है। हाई कोर्ट का यह फैसला सीबीआई की विशेष अदालत के उस निर्णय के सात साल बाद आया है, जिसमें राम रहीम को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला
शनिवार सुबह सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राम रहीम और अन्य आरोपियों के खिलाफ पेश किए गए सबूतों को अपर्याप्त मानते हुए निचली अदालत के आदेश को निरस्त कर दिया। राम रहीम के वकील जितेंद्र खुराना ने पुष्टि की है कि अदालत ने उन्हें इस मामले से जुड़े सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है। यह फैसला डेरा प्रमुख के लिए एक बड़ी कानूनी संजीवनी माना जा रहा है।
क्या था पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड?
पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड का यह पूरा मामला लगभग 24 साल पुराना है, जब अक्टूबर 2002 में हरियाणा के सिरसा स्थित उनके घर के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य हत्याकांड के पीछे की मुख्य वजह रामचंद्र छत्रपति द्वारा अपने अखबार ‘पूरा सच’ में एक गुमनाम पत्र प्रकाशित करना था, जिसमें डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के भीतर महिला अनुयायियों के साथ हो रहे कथित यौन शोषण का सनसनीखेज खुलासा किया गया था।
इस पत्र के प्रकाशन के बाद ही उन पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसके चलते साल 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सहित तीन अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, अब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया है और राम रहीम को इन आरोपों से मुक्त कर दिया है।
अभी जेल में ही रहेंगे राम रहीम
भले ही पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई हो, लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि वह जेल से बाहर आ जाएंगे। राम रहीम साल 2017 से अपनी ही दो शिष्याओं के साथ बलात्कार के संगीन जुर्म में 20 साल की जेल की सजा काट रहे हैं, जिसके कारण उन्हें सलाखों के पीछे ही रहना होगा। वर्तमान में वह हरियाणा की रोहतक स्थित सुनारिया जेल में बंद हैं और अपनी सजा पूरी कर रहे हैं। गौरतलब है कि सजा के दौरान राम रहीम कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुके हैं, जिसे लेकर समय-समय पर काफी विवाद और राजनीतिक चर्चाएं भी होती रही हैं।
रामचंद्र छत्रपति के परिवार ने इस मामले में दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ी है। साल 2002 में हुई हत्या के बाद यह मामला काफी समय तक सुर्खियों में रहा और अब 2026 में हाई कोर्ट के इस फैसले ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
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