
यूनिक समय, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में मचे भीषण युद्ध और इजरायल की सीधी धमकियों के बीच ईरान ने अपने नए ‘सुप्रीम लीडर’ के नाम का ऐलान कर दिया है। सोमवार सुबह ईरानी स्टेट टीवी ने आधिकारिक पुष्टि की कि मोजतबा खामेनेई को देश का तीसरा सर्वोच्च नेता चुना गया है। मोजतबा अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह लेंगे, जिनकी 28 फरवरी को तेहरान में एक इजरायली हमले के दौरान मौत हो गई थी।
चुनौतियों के बीच ‘ताजपोशी’
ईरान की 88 सदस्यीय ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने कई दौर की लंबी और गोपनीय बैठकों के बाद आखिरकार मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगा दी है, जो चुनौतियों से भरे इस दौर में देश की कमान संभालेंगे।
मोजतबा की यह ‘ताजपोशी’ ऐसे बेहद तनावपूर्ण समय में हुई है जब इजरायली सेना (IDF) ने खुलेआम यह धमकी दी है कि वह ईरान के अगले सुप्रीम लीडर बनने वाले व्यक्ति को भी अपना निशाना बनाएगी। 56 वर्षीय मोजतबा अब आधिकारिक तौर पर ईरान के सत्ता के सबसे बड़े केंद्र बन गए हैं और मिलिट्री व रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ के तौर पर युद्ध, शांति और परमाणु कार्यक्रम (यूरेनियम संवर्धन) जैसे गंभीर विषयों पर अंतिम फैसला लेने का अधिकार अब उन्हीं के पास होगा।
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद वह देश के तीसरे सुप्रीम लीडर बने हैं और वर्ष 2022 में मिली ‘अयातुल्ला’ की उपाधि ने इस पद के लिए उनकी योग्यता को पहले ही पुख्ता कर दिया था। अली लारीजानी ने इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि तेहरान के दुश्मनों को उम्मीद थी कि अली खामेनेई के बाद देश नेतृत्व के संकट या डेडलॉक में फंस जाएगा, लेकिन मोजतबा का चुनाव ईरान की स्थिरता और दुश्मनों को एक कड़ा जवाब है।
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