India: राज्यसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते भीषण संघर्ष पर जताई गहरी चिंता

Foreign Minister expressed deep concern in the Rajya Sabha

यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते भीषण संघर्ष पर भारत सरकार ने गहरी चिंता व्यक्त की है। सोमवार को राज्यसभा में बयान देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस उभरते घटनाक्रम पर पल-पल की नजर रख रहे हैं। जयशंकर ने सदन को बताया कि यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए एक गंभीर खतरा बन चुका है।

संकट के बीच ‘रेस्क्यू’ और कूटनीति

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में सदन को अवगत कराया कि यह वैश्विक संघर्ष न केवल बुनियादी ढांचे को तबाह कर रहा है, बल्कि भारत के आर्थिक हितों पर भी सीधा प्रहार कर रहा है। सरकार ने फंसे हुए भारतीयों को निकालने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर एक विशाल अभियान चलाया है, जिसके तहत 7 मार्च से 9 मार्च के बीच कुल 114 विशेष उड़ानें भारतीयों को लेकर स्वदेश पहुंची हैं।

विशेष रूप से ईरान में फंसे छात्रों और नागरिकों के लिए अर्मेनिया को एक ‘सेफ पैसेज’ बनाया गया है, जहाँ से उन्हें सड़क मार्ग के बाद विमानों के जरिए भारत लाया जा रहा है और तेहरान स्थित दूतावास इस रेस्क्यू के लिए हाई अलर्ट पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और उन्होंने यूएई, सऊदी अरब, कतर और इजरायल समेत खाड़ी के लगभग सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात कर भारतीय समुदाय की सुरक्षा का आश्वासन लिया है।

विदेश मंत्री ने बड़े दुख के साथ बताया कि व्यापारिक जहाजों पर हमलों में अब तक दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक लापता है, जिसके समाधान के लिए 2 मार्च को एक ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ का गठन किया गया है। खाड़ी क्षेत्र से होने वाला सालाना 200 अरब डॉलर का व्यापार और तेल-गैस की आपूर्ति भारत की लाइफलाइन है, इसलिए सप्लाई चेन में व्यवधान वर्तमान में सबसे बड़ी आर्थिक चिंता बनी हुई है।

मानवीय आधार पर भारत ने कोच्चि बंदरगाह पर ईरानी जहाज ‘IRIS LAVAN’ और उसके क्रू को शरण दी है, जिसके लिए ईरानी विदेश मंत्री ने भारत का विशेष आभार व्यक्त किया है। 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई CCS की बैठक में सभी मंत्रालयों को क्षेत्रीय सुरक्षा और छात्रों की समस्याओं को प्राथमिकता देने के कड़े निर्देश दिए गए थे।

विदेश मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि जनवरी 2026 में ही ईरान की यात्रा को लेकर चेतावनी दी गई थी, जिसे नजरअंदाज करने की वजह से अब निकासी की चुनौती बढ़ गई है। भारत का रुख पूरी तरह स्पष्ट है कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान है और सरकार के लिए शांति, भारतीय समुदाय की सुरक्षा व राष्ट्रीय हित (ऊर्जा और व्यापार) हमेशा सर्वोपरि रहेंगे।

कूटनीति और शांति की अपील

भारत ने एक बार फिर दोहराया कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। विदेश मंत्री ने कहा कि 20 फरवरी को ही सरकार ने सभी पक्षों से ‘संयम’ बरतने का आग्रह किया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तनाव कम करने के लिए केवल संवाद और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है। जयशंकर के मुताबिक, संघर्ष का दायरा अन्य देशों में फैलना और विनाश का बढ़ना पूरी दुनिया के लिए खतरनाक संकेत है।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: Delhi News: शराब घोटाला मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; 23 आरोपियों को नोटिस जारी मांगा जवाब

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*