
यूनिक समय, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में गहराते ईरान-इजरायल युद्ध और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार को बड़ी राहत देने के लिए ट्रंप सरकार ने एक हैरान करने वाला फैसला लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने अपने पुराने रुख से ‘यू-टर्न’ लेते हुए रूसी तेल पर लगे कड़े प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का ऐलान किया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने एक विशेष लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत विभिन्न देशों को समुद्र में ट्रांजिट के दौरान फंसे हुए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को खरीदने की अनुमति दी गई है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई बाधित होने की आशंका से कीमतें आसमान छू रही हैं। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता लाना और आम उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन की मार से बचाना है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल उस तेल पर लागू होगी जो पहले से ही जहाजों पर लदा हुआ है और रास्ते में है, ताकि रूस को कोई नया आर्थिक लाभ न मिले और बाजार में लिक्विडिटी बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह निर्णय व्यावहारिक कूटनीति का हिस्सा है। दरअसल, इससे पहले भारत को भी रूसी तेल के लिए 30 दिनों की विशेष छूट मिल चुकी है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण यदि सप्लाई चेन टूटती है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के चरमराने का खतरा है। ऐसे में अमेरिका ने रूसी तेल को एक ‘बफर’ के रूप में इस्तेमाल करने का रास्ता साफ कर दिया है। ट्रंप सरकार के इस फैसले से न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी, बल्कि उन देशों को भी राहत मिलेगी जो समुद्र में फंसे हुए कार्गो के कारण भारी नुकसान झेल रहे थे।
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