यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है, जहाँ से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा दांव पर लगी है। पिछले 31 दिनों से जारी इस भीषण जंग के बीच, अब अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर जमीनी हमले (Ground Invasion) की अटकलें तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों और क्षेत्र में 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की तैनाती ने इन आशंकाओं को और बल दे दिया है। मिशन 'परमाणु मुक्त ईरान' अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान का 400 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का भंडार है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका को डर है कि ईरान इस भंडार का उपयोग परमाणु हथियार बनाने के लिए कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देंगे। योजना के तहत, अमेरिकी विशेष बल एक बेहद खतरनाक मिलिट्री ऑपरेशन के जरिए इस यूरेनियम को ईरानी परमाणु केंद्रों से निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑपरेशन 'सुसाइड मिशन' जैसा हो सकता है, क्योंकि इसके लिए अमेरिकी सेना को कई दिनों तक ईरानी जमीन पर रुककर मुकाबला करना होगा। खर्ग द्वीप पर कब्जा 'फाइनेंशियल टाइम्स' को दिए एक विस्फोटक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र 'खर्ग द्वीप' पर कब्जा कर सकता है। ट्रंप ने कहा, "ईरान के पास वहां सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर है, हम उसे आसानी से ले सकते हैं।" उनका मानना है कि यदि ईरान के तेल संसाधनों पर नियंत्रण कर लिया जाए, तो तेहरान की आर्थिक कमर टूट जाएगी और वह समझौते के लिए मजबूर होगा। ट्रंप का यह बयान 'पॉलिसी ऑफ मैक्सिमम प्रेशर' का हिस्सा माना जा रहा है। पेंटागन की बढ़ी सक्रियता युद्ध की आहट के बीच पेंटागन ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी को युद्धस्तर पर बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिसके तहत लगभग 10,000 नए सैनिकों की अतिरिक्त तैनाती की जा रही है। इसी क्रम में 2,500 मरीन सहित 3,500 से अधिक अमेरिकी सैनिक पहले ही क्षेत्र में पहुँच चुके हैं और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को यह घोषणा भी कर दी है कि उनके पास ईरान के खिलाफ कई 'सैन्य विकल्प' तैयार हैं, जिन पर अब केवल राष्ट्रपति की अंतिम मुहर का इंतजार है। जोखिम और वैश्विक असर वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप इस ऑपरेशन में अमेरिकी सैनिकों को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर चिंतित जरूर हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए वह कड़ा फैसला लेने से पीछे नहीं हटेंगे। यदि अमेरिका ईरान की धरती पर जमीनी हमले के लिए कदम रखता है, तो यह न केवल एक क्षेत्रीय युद्ध होगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल और तीसरे विश्व युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: UP News: सीएम योगी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बांटे 69 हजार से अधिक स्मार्टफोन; पिछली सरकारों पर साधा निशाना [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]