यूनिक समय, नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में जारी भारी तनाव और अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सख्त नाकेबंदी के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पाकिस्तान के झंडे वाला कच्चा तेल वाहक (Crude Carrier) जहाज 'शालमार' इस प्रतिबंधित समुद्री मार्ग को पार करने वाला पिछले पांच दिनों में पहला टैंकर बन गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी नौसेना द्वारा सोमवार से की गई पूर्ण नाकेबंदी के बाद यह पहली ज्ञात आवाजाही है। अमेरिकी नेवी ने सोमवार से ईरान के बंदरगाहों और होर्मुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी कर रखी है। 'मरीन ट्रैफिक' के डेटा के अनुसार यह जहाज गुरुवार देर रात ओमान की खाड़ी की ओर रवाना हुआ। जहाज पर 450,000 बैरल कच्चा तेल लदा है, जो उसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लोड किया है। यह टैंकर अब पाकिस्तान के कराची पोर्ट की ओर बढ़ रहा है। 28 फरवरी को ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों और हालिया नाकेबंदी के बाद यह इस मार्ग से निकलने वाला पहला तेल टैंकर है। अमेरिकी प्रतिबंध अमेरिकी सेंट्रल कमांड और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने साफ कर दिया है कि इस समुद्री मार्ग पर नियम अब पूरी तरह बदल चुके हैं। अब किसी भी जहाज को खाड़ी से बाहर निकलने के लिए ईरानी और अमेरिकी सैन्य अधिकारियों, दोनों से अनुमति लेनी अनिवार्य है। 10,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक इस नाकेबंदी को लागू करने में तैनात हैं। उन्हें वाणिज्यिक जहाजों पर चढ़कर तलाशी लेने और सामान जब्त करने का अधिकार दिया गया है। यदि कोई जहाज भागने की कोशिश करता है, तो अमेरिकी सेना को चेतावनी के तौर पर गोली चलाने के आदेश दिए गए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पिछले तीन दिनों में 14 जहाज जोखिम के डर से वापस लौट गए हैं। नाकेबंदी का दायरा और कड़ाई यह नाकेबंदी ओमान के रास अल हद्द से लेकर ईरान-पाकिस्तान सीमा तक फैली हुई है। अमेरिका उन जहाजों को भी निशाना बना रहा है जो नाकेबंदी लागू होने से ठीक पहले वहां से निकले थे। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान से जुड़े किसी भी व्यापार (तेल, धातु, हथियार या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण) को पूरी तरह ठप करना है। क्या बढ़ेगा तनाव? होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी के बीच पाकिस्तानी टैंकर 'शालमार' की आवाजाही ने वैश्विक स्तर पर तनाव और कूटनीतिक हलचल को और अधिक गहरा दिया है। जहाज के पास अमेरिकी अनुमति होने या न होने की स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन इस सैन्य घेराबंदी को पार करना पाकिस्तान की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक सुरक्षा के बीच एक बड़े जोखिम का संकेत है। पिछले सात हफ्तों से सुनसान पड़े इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से शालमार का गुजरना अब यह तय करने का पैमाना बन गया है कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति क्या मोड़ लेगी। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Nashik TCS Scandal: परिवार ने खबरों में चल रहे दावों को नकारा, कहा- ‘HR हेड’ नहीं, महज टेली-कॉलर थी निदा खान [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]