यूनिक समय, नई दिल्ली। पंजाब की राजनीति में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया जब शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर 'मजदूर दिवस' के विशेष सत्र के दौरान शराब के नशे में विधानसभा आने का गंभीर आरोप लगाया। इस मुद्दे को लेकर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष के तीखे हमले और आरोप शिरोमणि अकाली दल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मुख्यमंत्री का एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि वह पवित्र सदन में शराब के नशे में पहुंचे थे। पार्टी ने मुख्यमंत्री के व्यवहार को शर्मनाक बताते हुए कहा कि उन्हें मजदूर दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर इस स्थिति में सदन नहीं आना चाहिए था। अकाली दल ने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि मुख्यमंत्री का 'डोप टेस्ट' कराया जाए ताकि पंजाब की जनता के सामने सच्चाई आ सके। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने न केवल मुख्यमंत्री बल्कि सभी विधायकों का 'एल्कोहल मीटर टेस्ट' कराने की मांग उठाई ताकि राज्य के मुखिया पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके। सदन की कार्यवाही पंजाब विधानसभा के स्पीकर ने कांग्रेस द्वारा दी गई डोप टेस्ट और अल्कोहल टेस्ट की मांग वाली चिट्ठी को सिरे से खारिज कर दिया। आरोपों के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह विशेष सत्र 'मजदूर दिवस' को समर्पित है। उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और बहसबाजी से बचने की अपील की। विशेष सत्र की पृष्ठभूमि और विवाद आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने 1 मई को मजदूर वर्ग के सम्मान में यह विशेष सत्र बुलाया है। यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब AAP के सात राज्यसभा सांसद (जिनमें से छह पंजाब से थे) पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। कांग्रेस नेता राजा वारिंग ने इस सत्र की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में है और इस सत्र से मजदूरों को कोई वास्तविक फायदा नहीं होगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Jabalpur Cruise Accident: माँ के सीने से लिपटा मिला 4 साल के मासूम का शव, मरने वालो की संख्या हुई 9