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Petrol Diesel Price: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल; मथुरा में पेट्रोल 2.75 रुपये और डीजल 3.01 रुपये प्रति लीटर महँगा

by Tarun Bhardwaj • May 15, 2026
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यूनिक समय, मथुरा। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी का असर अब सीधे कान्हा की नगरी मथुरा में भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और आपूर्ति संकट के बीच तेल कंपनियों ने ईंधन के दामों में बड़ा इजाफा किया है, जिससे स्थानीय नागरिकों और ट्रांसपोर्टरों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

नई कीमतें एक नजर में

मथुरा के विभिन्न पेट्रोल पंपों पर आज सुबह से ही ईंधन की बढ़ी हुई कीमतें प्रभावी हो गई हैं, जिसके तहत पेट्रोल के दामों में 2.75 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। वहीं, डीजल की कीमतों में 3.01 रुपये प्रति लीटर का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

ब्रज क्षेत्र में माल ढुलाई और निजी वाहनों के उपयोग पर इस बढ़ोतरी का सीधा और गहरा असर पड़ने की आशंका है, जिससे आने वाले दिनों में दैनिक उपभोग की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी देखी जा सकती है।

कीमतें बढ़ने की मुख्य वजह

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण बेहद गंभीर हैं, जहाँ 28 फरवरी से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में भारी उछाल आया है और कुछ समय पहले तक जो तेल $70 प्रति बैरल के आसपास मिल रहा था, उसकी कीमत अब $126 प्रति बैरल तक पहुँच चुकी है।

इसके बावजूद भारत में लंबे समय तक दाम स्थिर रखे गए थे, जिसके कारण सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन 1,000 करोड़ रुपये (महीने में 30 हजार करोड़ रुपये) का भारी घाटा उठाना पड़ रहा था, और इसी नुकसान की भरपाई के लिए अब कीमतों में वृद्धि करना आवश्यक हो गया है।

आर्थिक संकट और पीएम मोदी की अपील

डॉलर के मुकाबले रुपये की 95 के नीचे की ऐतिहासिक गिरावट और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से संकट की इस घड़ी में सहयोग करने की भावुक अपील की है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग करें, अनावश्यक विदेश यात्राओं को कुछ समय के लिए स्थगित करें और सोने की खरीद कम करें ताकि देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को स्थिर किया जा सके। रुपये के कमजोर होने के कारण आयात लगातार महंगा होता जा रहा है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था के सामने एक चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है।

सरकार ने यह स्पष्ट संकेत भी दिए हैं कि यदि वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के हालातों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में ऊर्जा और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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