यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने के बाद से ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार लगातार बड़े और कड़े फैसले ले रही है। इसी कड़ी में अब शुभेंदु सरकार ने एक और अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य के अल्पसंख्यक कार्य और मदरसा शिक्षा विभाग की ओर से एक नया आधिकारिक आदेश जारी किया गया है, जिसके तहत अब पश्चिम बंगाल के सभी मदरसों में 'वंदे मातरम' राष्ट्रीय गीत का गायन पूरी तरह से अनिवार्य (Compulsory) कर दिया गया है। सरकार का यह नया नियम राज्य के सभी सरकारी मदरसों के साथ-साथ सभी सहायता प्राप्त (Aided) और गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) मदरसों पर भी तत्काल प्रभाव से लागू होगा। स्कूलों के बाद अब मदरसों के लिए भी कड़ा रुख आपको बता दें कि मदरसों को लेकर जारी इस आदेश से ठीक एक सप्ताह पहले स्कूल शिक्षा विभाग ने भी ऐसा ही एक सख्त नोटिस जारी किया था। उस नोटिस में राज्य के सभी स्कूलों को कड़े निर्देश दिए गए थे कि हर दिन कक्षाएं (Classes) शुरू होने से पहले होने वाली सुबह की प्रार्थना सभा (Morning Assembly) में 'वंदे मातरम' गीत का गायन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। अब इसी व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए शुभेंदु सरकार ने इसे सभी मदरसों के लिए भी आवश्यक कर दिया है, जिसका पालन करना अब सभी मदरसा प्रबंधनों के लिए बाध्यकारी होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद लिया निर्णय राज्य सरकार का यह कदम दरअसल केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पूर्व में जारी किए गए उन दिशानिर्देशों के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गौरवशाली 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसके प्रसार और गायन को बढ़ावा देने की बात कही गई थी। जहाँ एक तरफ सरकार के इस फैसले को राष्ट्रवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं कई मदरसों ने इस आदेश का जमीनी स्तर पर पालन करना भी शुरू कर दिया है। कोलकाता के सुप्रसिद्ध जादवपुर विद्यापीठ जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों के प्रधानाध्यापकों का कहना है कि वे पिछले सप्ताह से ही राष्ट्रगान से ठीक पहले पूरी गरिमा के साथ 'वंदे मातरम' का गायन करवा रहे हैं। राज्य गीत को लेकर सस्पेंस बरकरार इस नए नियम के आने के बाद राज्य के कुछ स्कूल और मदरसा प्रमुखों ने व्यावहारिक दिक्कतों की ओर भी इशारा किया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती (पुरानी) सरकार के नियमों के तहत सुबह की प्रार्थना सभा में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित राज्य गीत 'बांग्लार माटी बांग्लार जल' गाना अनिवार्य था। नए आदेश में इस बात को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं की गई है कि अब इस राज्य गीत को 'वंदे मातरम' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ जारी रखा जाएगा या इसे हटा दिया गया है। एक स्कूल प्रधानाचार्य ने अपनी व्यावहारिक समस्या साझा करते हुए कहा कि हम राष्ट्रगान को किसी भी स्थिति में नहीं हटा सकते क्योंकि वह सर्वोच्च और अनिवार्य है। अब पहला गीत 'वंदे मातरम' होगा और यदि राज्य गीत को भी इसके साथ जोड़ा गया, तो प्रार्थना सभा काफी लंबी हो जाएगी, जिससे मुख्य कक्षाएं शुरू होने में देरी होगी। छात्रों को एक साथ तीन-तीन गीतों के लिए रोकना आसान नहीं होगा। शिक्षा विभाग की सफाई इस पूरे असमंजस और विवाद के बीच शिक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि नए सरकारी निर्देश में केवल और केवल राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को लेकर ही स्पष्ट आदेश जारी किया गया है। विभाग को फिलहाल 'वंदे मातरम' को ही दैनिक स्कूल और मदरसा प्रार्थना के रूप में अनिवार्य रूप से शुरू कराने का जिम्मा सौंपा गया है, और इस नए ड्राफ्ट में पूर्ववर्ती राज्य गीत का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। बहरहाल, शुभेंदु सरकार के इस फैसले ने बंगाल की सियासत और शैक्षणिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: UP News: गाजियाबाद के फेमस पैसेफिक मॉल में लगी भीषण आग; दमकल की आधा दर्जन गाड़ियां आग बुझाने में जुटी [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]