यूनिक समय, नई दिल्ली। ओमान तट के निकट कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए हमलों और उनमें तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत को लेकर भारत सरकार ने बेहद कड़ा और सख्त राजनयिक रुख अख्तियार कर लिया है। भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी दूतावास के प्रभारी और कार्यवाहक दूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय (साउथ ब्लॉक) में तलब किया। भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले व्यापारिक जहाजों पर अमेरिकी सैन्य बलों की इस हिंसक कार्रवाई को लेकर भारत ने अमेरिका के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बेहद संवेदनशील बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर भारत ने एक ही हफ्ते के भीतर दूसरी बार अमेरिकी दूत को तलब किया है; इससे पहले बुधवार रात को भी उन्हें विदेश मुख्यालय बुलाया गया था। अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार भारत सरकार ने पहली बार सार्वजनिक रूप से और बेहद बेबाकी के साथ यह स्वीकार किया है कि अमेरिकी नौसेना ने उन वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया, जिन पर भारतीय चालक दल सवार था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों की जान जाना पूरी तरह से टाला जा सकता था। भारत ने अमेरिकी पक्ष को स्पष्ट संदेश दिया है कि नागरिक और व्यापारिक जहाजों के खिलाफ इस प्रकार के घातक बल का उपयोग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है और इससे क्षेत्रीय स्थिरता भी सीधे तौर पर प्रभावित होती है। भारत ने अमेरिका से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने और इन हमलों को फौरन बंद करने की मांग की है। चार दिनों में तीन जहाजों को बनाया निशाना ओमान की खाड़ी और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी सेना ने इस हफ्ते एक के बाद एक तीन कमर्शियल जहाजों को अपना निशाना बनाया है, जिसमें से पहला हमला आठ जून को पलाऊ के झंडे वाले तेल टैंकर 'मैरीवेक्स' पर हुआ और राहत की बात यह रही कि इस पर सवार सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद दस जून को अमेरिका ने पलाऊ ध्वज वाले ही एक अन्य टैंकर 'सेटेबेलो' पर बेहद घातक और भीषण हमला किया, जिसमें जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन भारतीय नागरिकों की दुखद मौत हो गई। वहीं तीसरा हमला ग्यारह जून गुरुवार को गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर 'जलवीर' पर किया गया, जिसके इंजन रूम में आग लगने के बावजूद राहत दल ने मुस्तैदी दिखाते हुए उस पर सवार सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया। नागरिकों पर जानलेवा हमला पूरी तरह गलत विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ओमान तट पर हुई इस सैन्य कार्रवाई के पीछे की वजहों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिन तीन जहाजों पर हमले हुए हैं, उनमें से दो जहाजों पर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के 'विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय' (OFAC) की ओर से प्रतिबंध लगाए गए थे, जबकि एक अन्य जहाज अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं कर रहा था। दरअसल, यह अमेरिकी एजेंसी ईरानी और रूसी तेल का व्यापार करने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगाने और उन पर निगरानी रखने का काम करती है। भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि किसी भी तरह के प्रतिबंधों या नियमों की आड़ में निर्दोष नागरिकों और नाविकों पर इस प्रकार का जानलेवा और घातक बल प्रयोग करना पूरी तरह से अनुचित और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। इस घटना के बाद से पीड़ित नाविकों के परिजनों में गहरा रोष है और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: MP Rajya Sabha Election: कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से लगा बड़ा झटका; याचिका खारिज ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]