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Ayodhya: वकीलों का बड़ा अल्टीमेटम; चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव 3 दिन में छोड़ें रामनगरी, वरना पूरा शहर कर देंगे जाम

by Tarun Bhardwaj • June 29, 2026
Champat Rai, Anil Mishra, and Gopal Rao

Ayodhya: वकीलों का बड़ा अल्टीमेटम; चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव 3 दिन में छोड़ें रामनगरी, वरना पूरा शहर कर देंगे जाम

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यूनिक समय, अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर जनता के साथ-साथ अब कानूनी गलियारों में भी भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। इस महापाप के विरोध में फैजाबाद बार एसोसिएशन (अधिवक्ता संघ) की एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने साफ एलान किया है कि संघ का कोई भी सरकारी, नामित या निजी वकील इस शर्मनाक कांड के आरोपियों की पैरवी (केस) नहीं लड़ेगा।

इसके साथ ही वकीलों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने की खुली चेतावनी दी है। वकीलों का कहना है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे पूरी अयोध्या को जाम कर देंगे और किसी भी बाहरी व्यक्ति को अयोध्या में प्रवेश नहीं करने देंगे।

केस लड़ने पर ₹5 लाख का जुर्माना

फैजाबाद बार एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी कलिका प्रसाद मिश्र ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि यदि संघ का कोई भी अधिवक्ता इस निर्णय का उल्लंघन कर अभियुक्तों की पैरवी करता है, तो उसे तुरंत बार एसोसिएशन से निष्कासित (बाहर) कर दिया जाएगा।

यदि कोई वकील फिर भी केस लड़ना चाहता है, तो उसे पहले संघ में लिखित आवेदन देना होगा और प्रति अभियुक्त 5 लाख रुपये की सहयोग राशि जमा करनी होगी। बार एसोसिएशन के अनुसार, इस जुर्माने या सहयोग राशि से मिलने वाले धन का उपयोग पूरी तरह से अभियोजन पक्ष (प्रॉसीक्यूशन यानी राम मंदिर के पक्ष) को मजबूत करने और उसकी पैरवी के लिए किया जाएगा। वकीलों ने मांग की है कि मामले को दबाने के आरोपी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ भी तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए। यदि स्थानीय पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं करती है, तो बार एसोसिएशन न्यायालय (कोर्ट) की शरण लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू कराएगा।

सीबीआई जांच की मांग

अधिवक्ता संघ ने इस पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को पत्र लिखने का निर्णय लिया है। कलिका प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर जो याचिकाएं लंबित हैं, यदि उनसे सीबीआई जांच का आदेश नहीं मिलता है, तो बार एसोसिएशन खुद एक पक्षकार के रूप में हाईकोर्ट जाएगा। वकीलों ने संकल्प लिया है कि आवश्यकता पड़ने पर वे इस लड़ाई को देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (Supreme Court) तक लेकर जाएंगे ताकि करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले चेहरों को बेनकाब किया जा सके।

पुलिसिया जांच तेज

दूसरी ओर, इस मामले में पुलिसिया जांच भी बेहद तेज हो गई है। पुलिस और एसआईटी (SIT) की टीम ने पूर्व महासचिव चंपत राय से बंद कमरे में कई घंटों तक मैराथन पूछताछ की है और उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए हैं। इस दौरान मंदिर में चढ़ावे की गिनती, सुरक्षा मानकों, दान संग्रह की प्रक्रिया और बैंक रसीदों से जुड़े कई अहम सवाल पूछे गए। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी चढ़ावे के संग्रह से लेकर बैंक में जमा होने तक की पूरी ‘चेन ऑफ कस्टडी’ की कड़ाई से पड़ताल कर रही है।

इसी सिलसिले में पुलिस की एक विशेष टीम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अयोध्या धाम ब्रांच पहुंची, जहाँ राम मंदिर का मुख्य बैंक खाता संचालित होता है। इसी ब्रांच के दो कर्मचारियों— रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप को चढ़ावे की गिनती करने वाले आउटसोर्सिंग कर्मियों की निगरानी के लिए सुपरवाइजर नियुक्त किया गया था। जांच में सामने आया है कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से छह आरोपी इसी एसबीआई बैंक के आउटसोर्सिंग कर्मचारी हैं, जिनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव और रमाशंकर मुख्य रूप से शामिल हैं। पुलिस टीम बैंक से इन सभी कर्मियों की तैनाती, ड्यूटी रोस्टर और अन्य महत्वपूर्ण कागजात जब्त कर अपने साथ ले गई है।

संत समाज का फूटा गुस्सा

चढ़ावा कांड के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन और शुद्धिकरण की मांग तेजी से बढ़ गई है। इस बीच, मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेंद्र मिश्र ने प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट में एक आईएएस स्तर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की वकालत की थी।

नृपेंद्र मिश्र के इस सुझाव का देश भर से आए संत समाज ने न केवल पुरजोर विरोध किया, बल्कि इसे पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष और मणिराम छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज के 88वें जन्मोत्सव समारोह के अंतिम दिन संतों ने ध्वनि मत से इसके खिलाफ एक निंदा प्रस्ताव पारित किया। रामकथा के व्यास पीठ से मुख्य वक्ता आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने यह प्रस्ताव संतों के सामने रखा और साफ कहा कि अयोध्या और राम मंदिर के प्रबंधन में नौकरशाही (Bureaucracy) का दखल संत समाज को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है।

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