यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका के साथ होने वाले बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Agreement) पर अंतिम मुहर लगने की तैयारियों के बीच भारतीय उद्योग जगत के लिए एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी विभाग (US Department of the Treasury) ने अपनी सख्त प्रतिबंध सूची से 4 प्रमुख भारतीय कंपनियों को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। खास बात यह है कि इन कंपनियों पर रूस के साथ व्यापारिक संबंध रखने और यूक्रेन युद्ध के दौरान मॉस्को की मदद करने के आरोपों के तहत कड़ी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी। हाल ही में अमेरिका ने अपनी 'स्पेशली डेसिग्नेटेड नेशनल्स' (SDN) लिस्ट को अपडेट करते हुए इन भारतीय फर्मों को क्लीन चिट दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लगभग अपनी पूर्णता पर है और इसका महज 1 फीसदी काम ही शेष रह गया है। ऐसे में अमेरिका के इस फैसले को द्विपक्षीय व्यापार वार्ता को सफल बनाने की दिशा में एक बड़ा सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इन 4 भारतीय कंपनियों को मिली प्रतिबंधों से मुक्ति अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, इन सभी कंपनियों को पूर्व में एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14024 के तहत प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया था। जिन 4 कंपनियों को अब इस लिस्ट से बाहर कर बड़ी राहत दी गई है, उनके नाम निम्नलिखित हैं: आरआरजी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (RRG Engineering Technologies Private Limited) लोकेश मशीन्स लिमिटेड (Lokesh Machines Limited) गैलेक्सी बियरिंग्स लिमिटेड (Galaxy Bearings Ltd - अहमदाबाद स्थित) शौर्य एयरोनॉटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (Shaurya Aeronautics Private Limited) गौरतलब है कि साल 2024 में अमेरिकी विदेश विभाग के नियंत्रण वाले 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल' (OFAC) की तरफ से कुल 19 भारतीय कंपनियों और 2 भारतीय नागरिकों पर रूस पर लगे वैश्विक प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के आरोप में पाबंदियां थोप दी गई थीं। अमेरिका की इस एकतरफा कार्रवाई के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया था कि वह अमेरिकी प्रशासन के लगातार संपर्क में है और इस मुद्दे पर राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है। क्या होती है SDN लिस्ट? अमेरिकी वित्तीय प्रणाली में 'स्पेशली डेसिग्नेटेड नेशनल्स' यानी SDN लिस्ट को बेहद प्रभावी और सख्त माना जाता है, जिसे सीधे तौर पर OFAC यानी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल द्वारा जारी और नियंत्रित किया जाता है। इस सूची के तहत दुनिया भर की उन सभी कंपनियों, संगठनों और व्यक्तियों के नाम दर्ज किए जाते हैं, जो अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे रूस, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों के सीधे नियंत्रण में काम करते हैं या फिर उनके आर्थिक हितों को लाभ पहुंचाते हैं। नियमों के मुताबिक एक बार जब किसी भी कंपनी का नाम इस लिस्ट में शामिल हो जाता है, तो कोई भी अमेरिकी नागरिक, बैंक या वैश्विक वित्तीय संस्थान उस कंपनी के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार, लेनदेन या निवेश नहीं कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और लगातार बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के आधार पर अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस बेहद महत्वपूर्ण सूची को समय-समय पर अपडेट भी किया जाता है। 9 नई कंपनियां शामिल, लेकिन राहत सिर्फ भारतीयों को ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को किए गए इस ताजा संशोधन में जहां सिर्फ 4 भारतीय कंपनियों को ही प्रतिबंधों से मुक्त किया गया है, वहीं दूसरी तरफ 9 नई कंपनियों को इस ब्लैकलिस्ट में शामिल भी किया गया है। लिस्ट में शामिल की गई अधिकांश नई कंपनियां मैक्सिको की हैं। पूरी दुनिया में से केवल भारत की ही इन चार कंपनियों को बाहर निकाला गया है, जो वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते राजनयिक प्रभाव को दर्शाता है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Dausa Bus Accident: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर ट्रेलर से टकराकर आग का गोला बनी स्लीपर बस; 8 की मौत, 24 घायल ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]