यूनिक समय, आगरा। ताजनगरी के थाना सिकंदरा क्षेत्र के दहतोरा में एक पत्नी ने घरेलू कलह और पति की शराब की लत से तंग आकर बेहद शातिराना अंदाज में उसकी हत्या कर दी। आरोपी पत्नी ने पति की जान लेने के बाद उसकी लाश को कहीं बाहर फेंकने के बजाय अपने ही घर के बाथरूम में दफना दिया और सबूत मिटाने के लिए ऊपर से पक्का फर्श बनवा दिया। दिल दहला देने वाली बात यह है कि हत्या के बाद वह महिला करीब डेढ़ महीने (45 दिन) तक उसी घर में आराम से रह रही थी और रोजाना उसी बाथरूम में लाश के ठीक ऊपर नहाती भी रही। इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब सास की पेंशन के रुपयों को लेकर जेठ से हुआ विवाद गहरा गया और घबराहट में पत्नी ने खुद ही खौफनाक सच उगल दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर फर्श खुदवाया और क्षत-विक्षत हो चुके शव का कंकाल बरामद कर आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। खीर में मिलाईं 20 से अधिक नींद की गोलियां पुलिस की गिरफ्त में आई आरोपी महिला रूबी की शादी 16 साल पहले मूल रूप से भरतपुर (राजस्थान) के रहने वाले सुरेंद्र शर्मा (44) से हुई थी। सुरेंद्र के पिता राधेश्याम शर्मा एक इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले 24 साल से आगरा की रेणुका धाम कॉलोनी में सपरिवार रह रहे थे। सुरेंद्र और रूबी की दो बेटियां—प्राची (15) और सिद्धि (9) हैं। पड़ोसियों और परिजनों के मुताबिक, सुरेंद्र कोई स्थाई काम नहीं करता था और उसे शराब पीने की गंभीर लत थी, जिसके कारण पति-पत्नी में आए दिन भारी विवाद और मारपीट होती रहती थी। सुरेंद्र पहले डिलीवरी बॉय की नौकरी करता था, लेकिन वह भी उसने छोड़ दी थी। रूबी घर में ही कपड़े सिलने का काम करके जैसे-तैसे घर चलाती थी, लेकिन सुरेंद्र उन पैसों को भी छीन लेता था। रोज-रोज के इस नरक से छुटकारा पाने के लिए रूबी ने बेहद खतरनाक साजिश रची। बीती 18 मई को रूबी ने रात के समय सुरेंद्र के लिए विशेष रूप से खीर बनाई और उसमें भारी मात्रा में (20 से अधिक) नींद की गोलियां पीसकर मिला दीं। सुरेंद्र ने जैसे ही वह खीर खाई, वह गहरी बेहोशी में चला गया और अत्यधिक ओवरडोज के कारण उसकी मौत हो गई। बाथरूम का फर्श खुदवाकर लाश छुपाई सुरेंद्र की मौत की पुष्टि होने के बाद रूबी ने शव को ठिकाने लगाने के लिए दिमाग दौड़ाया। उसके घर के बाथरूम का फर्श कमरे के मुख्य फर्श से करीब दो से तीन फीट नीचे था। रूबी ने अकेले ही शव को घसीटकर बाथरूम में डाला, वहां गड्ढा खोदा और सुरेंद्र की लाश को उसमें दबाकर ऊपर से मिट्टी भर दी। वारदात को पूरी तरह छुपाने के लिए उसने अगले ही दिन घर पर एक राजमिस्त्री को बुलाया और यह बहाना बनाकर कि बाथरूम में पानी का रिसाव होता है, वहां सीमेंट और कंक्रीट डलवाकर पक्का पक्का फर्श बनवा दिया। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद 18 मई को ही रूबी ने अपने जेठ अनिल (जो शाहगंज में ऑटो चलाते हैं) को फोन किया और कहा कि पुलिस किसी पुराने मामले में घर पर दबिश दे रही है, इसलिए वह बच्चों और अपनी बुजुर्ग मां कमला को अपने घर ले जाएं। जेठ मां और बेटियों को ले गए और अगले दिन रूबी भी उनके घर पहुंच गई। उसने झूठ फैलाया कि सुरेंद्र घर से ₹3,000 और अपना मोबाइल छोड़कर कहीं चले गए हैं। परिजनों को गुमराह करने के लिए रूबी ने 26 मई को जेठ अनिल के साथ खुद प्राची टावर पुलिस चौकी जाकर पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। जब भी पुलिस जांच के लिए आती, रूबी रोने का नाटक करने लगती थी, जिससे किसी को उस पर रत्ती भर भी शक नहीं हुआ। 'पेंशन' के विवाद ने खोला राज इस कत्ल का राज खुलने के पीछे दो मुख्य कड़ियां रहीं—एक पुलिस का पुराना रिकॉर्ड और दूसरा सास की पेंशन का पैसा। दरअसल, मृतक सुरेंद्र के खिलाफ साल 2017 में एक ट्रक चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था। इसी मामले में कागजी सत्यापन (वेरिफिकेशन) के लिए बुधवार को अचानक सिकंदरा थाने के कुछ पुलिसकर्मी सुरेंद्र के घर पहुंचे। सुरेंद्र को न पाकर पुलिसकर्मियों ने प्रक्रिया के तहत रूबी से पूछताछ की और उसके कुछ फोटो खींच लिए। पुलिस द्वारा फोटो खींचे जाने से रूबी बुरी तरह घबरा गई। उसे लगा कि शायद किसी ने पुलिस को कत्ल की मुखबिरी कर दी है और अब वह पकड़ी जाएगी। इसी दौरान दूसरा विवाद सास कमला देवी की पेंशन को लेकर हुआ। राधेश्याम जी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी कमला देवी को हर महीने ₹32,000 पेंशन मिलती थी, जिसका एटीएम कार्ड और पासबुक रूबी ही संभालती थी। रूबी हर महीने पेंशन में से ₹10,000 अपने जेठ अनिल को देती थी, लेकिन जून के महीने में उसने पैसे देने से मना कर दिया और कहा कि इस बार पेंशन आई ही नहीं है। शक होने पर जेठ अनिल अपनी मां को लेकर भरतपुर बैंक शाखा पहुंचे, तो पता चला कि पेंशन तो कब की आ चुकी है और खाते से पैसे भी निकाल लिए गए हैं। बृहस्पतिवार सुबह जब अनिल ने आगरा लौटकर रूबी से इस बारे में कड़ाई से पूछताछ की और सुरेंद्र का सच बताने को कहा, तो रूबी एकदम खामोश हो गई। जेठ से बोली रूबी- 'तुम्हारे भाई बाथरूम में दो फीट नीचे हैं' घबराहट और चौतरफा दबाव के चलते रूबी मानसिक रूप से टूट गई। शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे उसने खुद फोन करके जेठ अनिल को रेणुका धाम स्थित घर पर बुलाया। अनिल जब घर पहुंचे तो उन्होंने पूछा कि सुरेंद्र कहाँ है? इस पर रूबी ने बेहद ठंडे दिमाग से कहा कि वह बाथरूम में हैं। अनिल ने जब बाथरूम में जाकर देखा तो वहां कोई नहीं था। तब रूबी ने रोते हुए खौफनाक सच का खुलासा किया और कहा कि "वह कहीं गए नहीं हैं, बल्कि इसी बाथरूम के फर्श के दो फीट नीचे दफन हैं।" यह सुनते ही जेठ के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत मामले की सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास, भारी पुलिस बल और फोरेंसिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मजदूरों को बुलाकर बाथरूम का पक्का फर्श तुड़वाया और खुदाई शुरू की। करीब दो फीट नीचे जाते ही सुरेंद्र का कंकाल कपड़ों के चीथड़ों के साथ बरामद हो गया। शव पूरी तरह गल चुका था, लेकिन सुरेंद्र के हाथ में पहने कड़े और गले की रुद्राक्ष की माला को देखकर बड़े भाई अनिल ने रूबी के सामने ही रोते हुए शव की शिनाख्त की। [embedpress]https://www.instagram.com/reel/DaW_nNUDJ51/?utm_source=ig_web_copy_link&igsh=MzRlODBiNWFlZA[/embedpress] बयान बदल रही कातिल पत्नी पुलिस हिरासत में आने के बाद आरोपी रूबी लगातार अपने बयान बदल रही है। पहले उसने खीर में नींद की गोलियां देकर मारने की बात कबूली, लेकिन बाद में पुलिस को गुमराह करने के लिए कहने लगी कि सुरेंद्र ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी और वह डर गई थी, इसलिए उसने शव को बाथरूम में छुपा दिया। हालांकि, डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास का कहना है कि एक महिला के लिए अकेले लाश को दफनाना और पूरा फर्श पक्का करवा लेना बिना किसी बाहरी मदद के मुमकिन नहीं लगता। पुलिस इस बिंदु पर गहराई से जांच कर रही है कि इस जघन्य अपराध और साजिश में रूबी के मायके पक्ष का या कोई अन्य प्रेमी या मददगार शामिल तो नहीं था। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: एएसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत बने आईपीएस (IPS); एसएसपी श्लोक कुमार ने किया सम्मानित ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]