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EPFO के नए नियमों से नौकरीपेशा लोगों की बल्ले-बल्ले; ईपीएफ स्कीम 2026 लागू, नौकरी बदलते ही ऑटो-ट्रांसफर होगा पीएफ फंड

by Tarun Bhardwaj • July 12, 2026
New EPFO ​​rules will benefit salaried people

EPFO के नए नियमों से नौकरीपेशा लोगों की बल्ले-बल्ले; ईपीएफ स्कीम 2026 लागू, नौकरी बदलते ही ऑटो-ट्रांसफर होगा पीएफ फंड

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यूनिक समय, नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नौकरीपेशा कर्मचारियों और पेंशनधारकों को बड़ी राहत देते हुए भविष्य निधि (PF) से जुड़े नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। सरकार ने ईपीएफ स्कीम 1952 के स्थान पर नई ‘ईपीएफ स्कीम 2026’ को पूरी तरह लागू कर दिया है। यह कदम सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को अमलीजामा पहनाने की दिशा में बड़ा बदलाव है। नए सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) प्रोजेक्ट के तहत अब पीएफ निकालना, नौकरी बदलने पर फंड ट्रांसफर करना और ब्याज की गणना करना बेहद आसान और पारदर्शी हो गया है। अगर आपकी सैलरी से भी हर महीने पीएफ कटता है, तो ये नए नियम सीधे तौर पर आपके काम के हैं।

अब पूरे देश का एक राष्ट्रीय डेटाबेस

ईपीएफओ ने अपने काम करने के पारंपरिक तरीके को पूरी तरह डिजिटल और सेंट्रलाइज्ड कर दिया है। पहले ईपीएफओ के हर क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) का अपना एक अलग डेटाबेस होता था, जिससे कर्मचारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब सभी सदस्यों के डेटा को एक ही ‘राष्ट्रीय डेटाबेस’ में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस केंद्रीकृत व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब देश का कोई भी पीएफ सदस्य किसी भी अधिकृत ईपीएफओ कार्यालय से अपनी सेवाएं ले सकेगा। नौकरी बदलने या शहर बदलने पर पुराने ऑफिस के चक्कर काटने की मजबूरी हमेशा के लिए खत्म हो गई है।

नया ईपीएफओ पोर्टल

नए ईपीएफओ सदस्य पोर्टल (EPFO Member Portal) को बेहद आधुनिक और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। अब लॉगिन करते ही सदस्यों को पीएफ बैलेंस, क्लेम स्टेटस, पेंशन योग्य सेवा का रिकॉर्ड और अब तक मिले सभी लाभों की पूरी जानकारी एक ही स्क्रीन पर मिल जाएगी।

इसके साथ ही, पोर्टल पर अब ‘प्री-वैलिडेशन’ (स्वतः सत्यापन) का नया सिस्टम जोड़ा गया है। इसके तहत जब भी कोई सदस्य पीएफ क्लेम के लिए आवेदन करेगा, तो सिस्टम उसकी पहले ही जांच कर लेगा। यदि आवेदन में कोई गलती या दस्तावेज की कमी होगी, तो उसकी जानकारी तुरंत एसएमएस (SMS) और पोर्टल के जरिए सदस्य को मिल जाएगी। इससे क्लेम रिजेक्ट होने की संभावना न के बराबर हो जाएगी। इसके अलावा, अब पोर्टल पर यह भी स्पष्ट दिखाई देगा कि सदस्य किस श्रेणी में कितनी अधिकतम राशि निकाल सकता है, जिससे तय सीमा से अधिक राशि भरने के कारण होने वाले रिजेक्शन बंद हो जाएंगे।

5 लाख रुपये तक का एडवांस क्लेम होगा ऑटो-सेटल

ईपीएफओ ने आपातकालीन स्थिति में पैसे निकालने की सीमा में पांच गुना बढ़ोतरी की है। अब पूरी तरह से केवाईसी (KYC) से जुड़े और सत्यापित खातों से 5 लाख रुपये तक का एडवांस पीएफ क्लेम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ‘ऑटो सेटलमेंट’ के जरिए निपटाया जाएगा। पहले यह सीमा महज 1 लाख रुपये थी।

यदि क्लेम की जांच के दौरान ईपीएफओ को किसी अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता होती है, तो वह ऑनलाइन ही सदस्य से स्पष्टीकरण मांगेगा और सदस्य भी ऑनलाइन जवाब दे सकेंगे। केंद्रीय भुगतान प्रणाली (Centralized Payment System) लागू होने से अब क्लेम मंजूर होने वाले दिन ही पैसा सीधे सदस्य के बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाएगा।

नौकरी बदलते ही ऑटो-ट्रांसफर होगा पीएफ फंड

अब यदि कोई कर्मचारी अपनी नौकरी बदलता है, तो उसे अपने पुराने पीएफ फंड को नए खाते में ट्रांसफर करने के लिए किसी फॉर्म को भरने या पुराने और नए एम्प्लॉयर (नियोक्ता) की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होगी। आधार कार्ड से लिंक यूएएन (UAN) वाले खाते नौकरी बदलते ही स्वतः ही नए खाते में ट्रांसफर हो जाएंगे।

यही नहीं, कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के पेंशनधारकों को भी केंद्रीय पेंशन भुगतान प्रणाली से जोड़ दिया गया है। अब पेंशनर्स देश के किसी भी ईपीएफओ कार्यालय में जाकर अपनी सेवाएं ले सकते हैं और अपना जीवन प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा कर सकते हैं। किसी भी रीजनल ऑफिस से मंजूर हुई पेंशन अब देश के किसी भी बैंक खाते में सीधे भेजी जा सकेगी।

15 जुलाई तक खातों में आएगा 8.25% ब्याज

अक्सर पीएफ धारकों को शिकायत रहती थी कि वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद भी ब्याज का पैसा खातों में आने के लिए अक्टूबर या नवंबर तक का लंबा इंतजार करना पड़ता था। केंद्रीय रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के अनुसार, नए सिस्टम के जरिए वित्त वर्ष 2025-26 का करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का ब्याज ऑटो-प्रोसेस किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि 15 जुलाई तक देश के करीब 34 करोड़ ईपीएफ खातों में 8.25% की दर से ब्याज की राशि जमा कर दी जाए।

इसके अलावा ब्याज की गणना (Interest Calculation) का नियम भी बदल दिया गया है। पुराने नियम के तहत यदि कोई सदस्य अपना पूरा पीएफ निकालता था, तो ब्याज की गणना केवल पिछले महीने के आखिरी दिन तक ही होती थी। यदि भुगतान में 15-20 दिन की देरी होती थी, तो उन दिनों का ब्याज मार दिया जाता था। नए नियम के तहत अब अंतिम पीएफ सेटलमेंट में ब्याज की गणना ‘भुगतान की मंजूरी की तारीख’ (Date of Approval) तक की जाएगी। यानी भुगतान में देरी होने पर भी उन अतिरिक्त दिनों का पूरा ब्याज सदस्य को मिलेगा।

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