यूनिक समय, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ओला, उबर और इनड्राइव जैसी कैब एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी और यात्रियों के शोषण के दिन अब खत्म होने वाले हैं। राज्य के परिवहन विभाग ने बहुप्रतीक्षित 'उत्तर प्रदेश एग्रीगेटर पॉलिसी' का अंतिम ड्राफ्ट तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेज दिया है। इस नई नीति के लागू होते ही कैब संचालक यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूल सकेंगे। पॉलिसी में यात्रियों के हितों और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है, वहीं बार-बार बुकिंग कैंसिल करने वाले ड्राइवरों और कंपनियों पर सख्त जुर्माने का प्रावधान किया गया है। एग्रीगेटर पॉलिसी न होने के कारण अब तक ये कंपनियां बिना किसी डर के पीक आवर्स में कई गुना किराया वसूल रही थीं, जिस पर अब पूरी तरह लगाम लग जाएगी। पीक आवर में 50% से ज्यादा किराया बढ़ाने पर रोक परिवहन विभाग द्वारा तैयार की गई नई पॉलिसी के तहत अब कैब कंपनियों के लिए सरकार द्वारा तय किया गया बेस किराया ही लागू होगा। अक्सर देखा जाता है कि बारिश के समय, दफ्तर के समय (पीक आवर्स) या त्योहारों पर कैब कंपनियां किराया दोगुना या तिगुना कर देती हैं। नई व्यवस्था के तहत किसी भी परिस्थिति या पीक आवर में कंपनियां मूल किराए से 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगी। इससे दैनिक सफर करने वाले आम यात्रियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। ड्राइवर ने ट्रिप कैंसिल की तो जेब से भरेगा किराया अक्सर यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत यह होती है कि कैब ड्राइवर बुकिंग स्वीकार करने के बाद कॉल करके ट्रिप कैंसिल करने का दबाव बनाते हैं या खुद कैंसिल कर देते हैं। नई पॉलिसी में इस समस्या का बेहद कड़ा इलाज ढूंढा गया है। अब अगर कोई ड्राइवर बिना किसी ठोस कारण के बुकिंग कैंसिल करता है, तो उस पूरी ट्रिप का हर्जाना (किराया) खुद ड्राइवर को भुगतना होगा। इसके साथ ही, बुकिंग होने के बाद ड्राइवर को तय समय पर यात्री के पास पहुंचना अनिवार्य होगा। यदि ड्राइवर देरी से पहुंचता है, तो उस पर न्यूनतम 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं, यदि यात्री की तरफ से ट्रिप कैंसिल की जाती है, तो यात्री पर भी 100 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। बिना सरकारी लाइसेंस के नहीं चलेंगी कैब डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (एसटीए) सगीर अहमद अंसारी ने नीति के संबंध में बताया कि इस पॉलिसी को जल्द से जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी है। पॉलिसी लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश की सीमा में कैब संचालित करने के लिए सभी एग्रीगेटर्स को राज्य सरकार से आधिकारिक लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। नए लाइसेंस के लिए शुल्क 5 लाख रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि इसके नवीनीकरण (रिन्यूअल) के लिए 25 हजार रुपये की फीस तय की गई है। इसके अलावा कंपनियों को 50 लाख रुपये तक का सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जमा करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने या तय संख्या से अधिक वाहन चलाने पर भारी जुर्माना लगेगा और कंपनियों का टेंडर व लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। नशे में ड्राइविंग पर 'जीरो टॉलरेंस' यह पॉलिसी न केवल यात्रियों बल्कि ड्राइवरों के कल्याण और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करती है। नई नीति के तहत कैब कंपनियों को अपने ड्राइवरों का न्यूनतम 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस (जीवन बीमा) कराना अनिवार्य होगा। वहीं, यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न करते हुए परिवहन विभाग ने साफ किया है कि ड्यूटी के दौरान नशा या शराब का सेवन करने वाले ड्राइवरों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई जाएगी। शिकायत सही पाए जाने पर ड्राइवर का लाइसेंस तुरंत निरस्त कर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: मथुरा-वृंदावन में थमेंगे ऑटो और ई-रिक्शा के पहिए; ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने किया तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]