यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक और घातक युद्ध के स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना (US Army) ने दावा किया है कि उसने मंगलवार (14 जुलाई 2026) को ईरान के छह से अधिक प्रमुख सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं। अमेरिका का यह सैन्य ऑपरेशन करीब 5 घंटे तक लगातार चला। दूसरी ओर, ईरान ने भी घुटने टेकने के बजाय अमेरिका को करारा जवाब देते हुए खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इस महायुद्ध की वजह से वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में अचानक 2 प्रतिशत की भारी तेजी दर्ज की गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का दावा अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 13 जुलाई की रात को ईरान के खिलाफ पांच घंटे तक एक बड़ा और सटीक सैन्य ऑपरेशन चलाया गया। इस हवाई हमले के दौरान अमेरिकी वायुसेना और मिसाइल यूनिट ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ठिकानों—बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स, ड्रोन सेंटर्स और उनकी नौसेना के ठिकानों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना था। पेंटागन के अनुसार, इस समय किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर तैनात हैं। ईरान का पलटवार अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए करारा पलटवार किया है। IRGC ने दावा किया है कि उन्होंने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के मुख्य बेस 'अल-जुफैर' पर बड़ा हमला किया है। ईरान के मुताबिक, इस जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी सेना के हथियार भंडार, सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेंटर और अमेरिकी सैनिकों के बैरक (आवास) वाली एक बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा ईरान ने अमेरिका के एक अत्याधुनिक MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को भी मार गिराने का दावा किया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का अखाड़ा विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच एक शांति समझौते को लेकर सहमति बनती दिख रही थी, लेकिन यह उम्मीदें उस समय धराशायी हो गईं जब ईरान ने रणनीतिक रूप से संवेदनशील 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में दो तेल टैंकर जहाजों पर हमला कर दिया। इस उकसावे वाली कार्रवाई के बाद अमेरिका ने जवाबी हमला किया और दोनों देशों के बीच युद्ध की आग दोबारा भड़क उठी। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी हॉर्मुज क्षेत्र में अपने दो तेल टैंकरों पर हमले का आरोप लगाया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान ने अमेरिका पर ही पूर्व के समझौतों को कमजोर करने का ठीकरा फोड़ा है। वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया इस भीषण सैन्य टकराव का सबसे सीधा और बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। युद्ध की खबर फैलते ही वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है। तेल की कीमतों में आया यह उछाल पिछले एक महीने का सबसे उच्चतम स्तर है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में वैश्विक ईंधन आपूर्ति चेन पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे दुनिया भर में महंगाई और ऊर्जा संकट का खतरा बेहद गंभीर रूप ले लेगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathrua News: सासनी एसडीएम नीरज शर्मा बने मथुरा-वृंदावन नगर निगम के नए सहायक नगर आयुक्त ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]