यूनिक समय, मथुरा। पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का सीधा असर अब धर्मनगरी मथुरा और वृंदावन में साफ तौर पर देखने को मिलने लगा है। पिछले कुछ दिनों से घाटों से काफी दूर बह रही कालिंदी (यमुना नदी) अब उफान पर आते हुए सीधे घाटों तक पहुंच गई है। हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज और दिल्ली के ओखला बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण यमुना के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। नदी का पानी अचानक बढ़ने से जहां एक तरफ वृंदावन के प्रसिद्ध केशीघाट की आधी सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं, वहीं दूसरी तरफ नदी के किनारे के निचले इलाकों (खादर क्षेत्रों) में रहने वाले स्थानीय निवासियों की चिंताएं और धड़कनें एक बार फिर बढ़ने लगी हैं। केशीघाट की 14 में से 7 सीढ़ियां पानी में डूबीं यमुना नदी में आई इस पानी की आमद का सबसे बड़ा असर वृंदावन के ऐतिहासिक केशीघाट पर दिखाई दे रहा है। जलस्तर में हुई अचानक वृद्धि के कारण केशीघाट की कुल 14 सीढ़ियों में से 7 सीढ़ियां पूरी तरह पानी में डूब चुकी हैं। पानी का बहाव तेज होने और घाटों तक जलभराव होने के कारण यहां चल रहा महत्वाकांक्षी 'रिवर फ्रंट' का निर्माण कार्य भी प्रशासन द्वारा सुरक्षा के लिहाज से फिलहाल के लिए रोक दिया गया है। यही नहीं, यमुना के जल में हुई इस बढ़ोतरी के कारण यमुना किनारे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रखा गया अस्थायी चेंजिंग रूम (कपड़े बदलने का स्थान) भी धीरे-धीरे पानी में डूबने लगा है। पिछले 24 घंटे में दो फीट बढ़ा पानी विद्युत और सिंचाई विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पिछले महज 24 घंटे के भीतर यमुना का जलस्तर करीब दो फीट तक बढ़ गया है। सोमवार को ओखला बैराज से 20 हजार क्यूसेक और हथिनी कुंड बैराज से 7 हजार क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा गया था। बैराजों से डिस्चार्ज किया गया यह भारी-भरकम पानी बुधवार की शाम तक मथुरा-वृंदावन के घाटों तक पहुंचने की पूरी संभावना है, जिससे जलस्तर में अभी और अधिक उछाल देखने को मिल सकता है। हालांकि, यमुना में पानी आने के बाद घाटों पर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही और उत्साह काफी बढ़ गया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना में स्नान और आचमन कर रहे हैं, जबकि स्थानीय नाविक भी श्रद्धालुओं को नावों के जरिए उफनती यमुना की सैर करा रहे हैं। चेतावनी निशान से 1.30 मीटर नीचे है पानी सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मथुरा में यमुना नदी का खतरे का निशान 166 मीटर पर है, जबकि चेतावनी का निशान 165.20 मीटर निर्धारित है। राहत की बात यह है कि वर्तमान में नदी का वास्तविक जलस्तर चेतावनी के निशान से करीब 1.30 मीटर नीचे बना हुआ है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष (2023) आई ऐतिहासिक और विनाशकारी बाढ़ के दौरान यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को काफी पीछे छोड़ते हुए करीब 168 मीटर तक पहुंच गया था, जिसने मथुरा के गोवर्धन ड्रेन, जैंत, वृंदावन के खादर और मथुरा शहर के दर्जनों रिहायशी इलाकों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया था। पिछले साल के उस खौफनाक मंजर और भारी नुकसान को याद करते हुए निचले इलाकों में झुग्गी-झोपड़ी और पक्के मकान बनाकर रह रहे लोग इस बार पहले से ही सतर्क हो गए हैं और ऊंचे स्थानों की तरफ नजरें टिकाए हुए हैं। प्रशासन का दावा यमुना के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के खतरों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह सामान्य है और पैनिक होने या चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष सक्रिय कर दिया गया है और नदी के हर घंटे के जलस्तर पर पैनी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि यदि पहाड़ों में और बारिश होती है या बैराजों से पानी की मात्रा बढ़ाई जाती है, तो खादर क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए प्रशासन ने अपनी सभी आवश्यक तैयारियां एडवांस में पूरी कर ली हैं। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: TCS Share Price: JFK एयरपोर्ट और ABB से करार के बाद TCS के शेयरों में जबरदस्त तेजी; 5 सेशन में 5% उछला स्टॉक ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]