यूनिक समय, मथुरा। ब्रजमंडल में आस्था और भक्ति का अनूठा रंग बिखरते हुए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के तत्वावधान में गुरुवार (16 जुलाई 2026) को भगवान जगन्नाथ जी की पारंपरिक व भव्य रथयात्रा पूरी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर से सायंकाल ठीक 5:00 बजे आरंभ हुई इस दिव्य रथयात्रा के दर्शन कर देश-विदेश से पधारे हजारों श्रद्धालु निहाल हो उठे और पूरी जन्मभूमि 'जय जगन्नाथ स्वामी' के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठी। स्वर्णिम मुकुट और दिव्य श्रृंगार के साथ काष्ठ रथ पर विराजे ठाकुरजी रथयात्रा के शुभारंभ से पूर्व पवित्र गर्भगृह परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान जगन्नाथ जी, उनके अग्रज बलभद्र (बलराम) जी, अनुजा सुभद्रा जी और सुदर्शन चक्र (श्रीचक) के विग्रहों को संकीर्तन की मंगल ध्वनि के बीच गर्भगृह से लाकर विशेष रूप से सुसज्जित किए गए दिव्य काष्ठ रथ में विराजमान कराया गया। पूजाचार्यों द्वारा तीनों श्रीविग्रहों का दिव्य श्रृंगार कर उन्हें स्वर्णिम मुकुट धारण कराए गए। इसके पश्चात श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, डॉ. विनोद बनर्जी, डॉ. रोशन लाल और पुलिस अधीक्षक सुरक्षा राजकुमार अग्रवाल आदि ने ठाकुरजी की महाआरती उतारी। सोने की झाड़ू से रथ के मार्ग को बुहारने की पारंपरिक रस्म (छेरा पहरा) के बाद जयघोष के साथ रथयात्रा को आगे बढ़ाया गया। भक्ति और नृत्य का अद्भुत संगम, झूम उठे श्रद्धालु भक्ति और नृत्य का अद्भुत संगम दर्शाती इस रथयात्रा का दृश्य अत्यंत मनोहारी और ब्रज की अनूठी सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित कर रहा था, जिसमें सबसे आगे ढोल-तांसा पार्टी व बैंड की सुमधुर लहरियों के साथ ब्रजमंडल के गौड़ीय संकीर्तन मंडल के साधु-संत 'हरिबोल' और 'जय जगन्नाथ' का उच्चारण करते हुए उद्दाम नृत्य कर रहे थे। इसके साथ ही, रथयात्रा में शामिल हुए मणिपुर के भक्तों के भक्तिपूर्ण संकीर्तन और विशेष पारंपरिक नृत्य ने सभी ब्रजवासियों व श्रद्धालुओं का मन मोह लिया जिससे लोग उनके साथ झूमने पर मजबूर हो गए, वहीं यात्रा के मध्य चैतन्य महाप्रभु और निताई-निमाई के युगल स्वरूप की सजाई गई भव्य झांकी सभी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी रही। गर भ्रमण कर भक्तों के बीच पहुंचे भगवान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नगर भ्रमण के दौरान स्वयं भगवान जगन्नाथ अपने गर्भगृह से बाहर आकर भक्तों को दर्शन देते हैं। रथयात्रा श्रीकृष्ण जन्मस्थान से शुरू होकर डीग गेट, मंडी रामदास, चौक बाजार, स्वामीघाट, राजाधिराज बाजार, छत्ता बाजार, तिलक द्वार, कोतवाली मार्ग, भरतपुर दरवाजा और दरेसी मार्ग से होती हुई पुनः जन्मस्थान प्रांगण पहुंची। पूरे मार्ग में विभिन्न व्यापारिक व सामाजिक संगठनों द्वारा स्थान-स्थान पर तोरण द्वार सजाकर भगवान जगन्नाथ की आरती उतारी गई, पुष्पवर्षा की गई और श्रद्धालुओं के लिए शीतल जल, शर्बत व विभिन्न प्रकार के प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस दौरान रथ को खींचकर पुण्य कमाने के लिए श्रद्धालुओं में रस्सा छूने की होड़ मची रही। वृहद महाप्रसाद और भव्य भंडारे का आयोजन श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान द्वारा रथयात्रा के उपरान्त परिसर में भगवान जगन्नाथ जी को विशेष भोग लगाकर वृहद मात्रा में आम-प्रसाद और हलुआ-प्रसाद का वितरण किया गया। इसके साथ ही रथयात्रा के संपूर्ण मार्ग में श्रद्धालुओं को पवित्र 'भात-प्रसाद' (खिचड़ी प्रसाद) बांटा गया। यात्रा के पुन: जन्मस्थान परिसर पहुंचने पर भव्य प्रसादी भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के साथ-साथ मंदिर दर्शन के लिए आए हजारों भक्तों ने बड़े ही भाव से प्रसाद ग्रहण किया। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: New Zealand Earthquake: न्यूजीलैंड में 6.3 की तीव्रता के भूकंप से कांपी धरती; तटीय इलाकों में सुनामी का हाई अलर्ट जारी ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]