यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आज एक और स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। हैदराबाद की निजी स्पेस कंपनी 'स्काईरूट एयरोस्पेस' ने आज शनिवार, 18 जुलाई को देश का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्चपैड-1 से दोपहर ठीक 12:05 बजे इस ऐतिहासिक रॉकेट ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी। इससे पहले लॉन्चिंग का समय सुबह 11:30 बजे तय किया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से लॉन्च से महज 5 मिनट पहले काउंटडाउन को रोक दिया गया था, जिसे कुछ देर के होल्ड के बाद दोबारा शुरू कर सफलतापूर्वक संपन्न कराया गया। इस पूरे मिशन का मुख्य उद्देश्य रॉकेट की परिचालन क्षमताओं और तकनीकी सटीकता की टेस्टिंग करना है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) के वैज्ञानिक भी इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए स्काईरूट के लॉन्च कंट्रोल सेंटर में मौजूद रहे। इसके साथ ही इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) जाने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी इस गौरवपूर्ण क्षण को देखने के लिए सतीश धवन स्पेस सेंटर पहुंचे। मिशन आगमन इस बेहद खास लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है, जिसके तहत विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ तकनीक से लेकर कला जगत से जुड़े कई अनोखे पेलोड्स लेकर अंतरिक्ष रवाना हुआ है। इनमें कॉमर्शियल और टेक्नोलॉजी पेलोड्स के तौर पर ग्रह स्पेस, कॉस्मोसर्व स्पेस, डीक्यूब्ड का स्पेस रिसर्च पेलोड और खुद स्काईरूट एयरोस्पेस का इन-हाउस स्कोप पेलोड शामिल है। इस मिशन की सबसे अनोखी बात यह है कि इसके जरिए अंतरिक्ष में 18 कैरेट सोने से बनी एक बेहद खूबसूरत कलाकृति भी भेजी गई है। कॉस्मोस डायमंड्स की इस सूक्ष्म कलाकृति को 'कॉस्मिक ब्लूम' नाम दिया गया है, जो कि सोने से बना एक छोटा सा रॉकेट है। इस माइक्रो-आर्ट पीस पर देश के महान वैज्ञानिक सर सी वी रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अत्यंत सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं। इसके साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा गया एक विशेष पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष भेजा गया है, जिस पर 'वंदे मातरम' शब्द अंकित हैं। तकनीकी खूबिया तकनीकी खूबियों की बात करें तो विक्रम-1 पूरी तरह से हल्के और अत्यधिक मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना दुनिया का पहला अनूठा ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर की मजबूती स्टील की तुलना में पांच गुना ज्यादा होती है और वजन में यह बेहद हल्का होता है, जिसकी वजह से रॉकेट का कुल वजन काफी कम हो गया है और इसकी ईंधन दक्षता कई गुना बढ़ गई है। चार चरणों वाले इस अत्याधुनिक रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगाया गया है। यह रॉकेट करीब 350 किलोग्राम तक का पेलोड या वजन अंतरिक्ष में ले जाने में पूरी तरह सक्षम है और यह विभिन्न तकनीकी उपकरणों को धरती से करीब 450 किलोमीटर ऊपर पृथ्वी की सर्कुलर निचली कक्षा (लोअर अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित करेगा। इस रॉकेट में कंपनी द्वारा इन-हाउस तैयार किए गए अत्याधुनिक इंजन लगे हैं, जिनमें 3डी प्रिंटेड इंजन भी शामिल हैं। इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पूरी टीम को बधाई दी और इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक ऐतिहासिक नई शुरुआत बताया। पीएम मोदी ने कहा कि स्काईरूट एयरोस्पेस का यह चार-चरण वाला रॉकेट तेजी से और जरूरत के हिसाब से किफायती लॉन्च सेवाएं देने के लिए स्वदेशी तकनीक से बनाया गया है। गौरतलब है कि देश के स्पेस सेक्टर की मजबूत नींव रखने वाले महान और दूरदर्शी वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में ही स्काईरूट कंपनी अपने सभी रॉकेट्स का नाम 'विक्रम' सीरीज पर रखती है। स्काईरूट ने इससे पहले साल 2022 में 'विक्रम-S' सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक गया था, लेकिन अब विक्रम-1 सीधे पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित होकर भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को एक नई और अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले गया है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Mathura News: अवैध खनन की रंजिश में दैनिक अखबार के पत्रकार पर जानलेवा हमला; कार से 3 KM पीछा कर लाठी-डंडों से पीटा ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]