यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तेजी से बढ़ते तनाव और लाल सागर व बाब अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में गहराते संकट के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण वैश्विक घटनाक्रम सामने आया है। शुक्रवार को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक ऐतिहासिक और रणनीतिक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत प्रावधान किया गया है कि यदि तीनों में से किसी भी एक देश पर कोई भी हमला होता है, तो उसे तीनों राष्ट्रों पर किया गया हमला माना जाएगा। मक्का संयुक्त रक्षा समझौता मक्का के अल-सफा पैलेस में आयोजित 'संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन' में इस संधि पर मुहर लगाई गई। इस बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए। जारी किए गए संयुक्त बयान के अनुसार, किसी भी एक देश के खिलाफ होने वाली सशस्त्र आक्रामक कार्रवाई को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा, जिसके तहत तीनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के सभी पहलुओं को मजबूती दी जाएगी। पाकिस्तान और सऊदी अरब का पहले से जारी रणनीतिक सहयोग उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष सितंबर में भी पाकिस्तान और सऊदी अरब ने "स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट" पर हस्ताक्षर किए थे। उस समझौते के तहत पाकिस्तान ने रक्षा सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण और सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने सैनिक और लड़ाकू विमान सऊदी अरब भेजे थे। नेताओं ने कहा कि यह नया मक्का समझौता तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों, भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत बंधनों पर आधारित है, जो उनके साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाएगा। तनावपूर्ण माहौल में उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता मक्का में आयोजित इस शिखर सम्मेलन से ठीक पहले पाकिस्तान और सऊदी नेतृत्व के बीच उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सेना प्रमुख (फील्ड मार्शल) आसिम मुनीर ने सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात की, जिसमें पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मौजूद रहे। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने स्पष्ट किया कि हालांकि यह समझौता तत्काल क्षेत्रीय संकट के दौर में हुआ है, लेकिन इसका महत्व तात्कालिक परिस्थितियों से कहीं अधिक है, क्योंकि यह समझौता क्षेत्र में बहुपक्षीय सहयोग, रणनीतिक तालमेल और दीर्घकालिक सुरक्षा व स्थिरता को मजबूती प्रदान करेगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Vrindavan: वृंदावन धाम की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से संतों की बड़ी अपील ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]