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Vrindavan: वृंदावन धाम की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से संतों की बड़ी अपील

by Tarun Bhardwaj • August 7, 2026
A major appeal from the saints to the devotees

Vrindavan: वृंदावन धाम की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने के लिए देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से संतों की बड़ी अपील

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यूनिक समय, वृंदावन। भगवान श्रीकृष्ण की पावन लीलास्थली वृंदावन को केवल एक धार्मिक या पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि अगाध आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का मुख्य केंद्र माना जाता है। वृंदावन धाम की पवित्रता, स्वच्छता और धार्मिक मर्यादा को अक्षुण्ण रखने के लिए संतों और धर्माचार्यों ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से एक विशेष अपील की है। उन्होंने कहा है कि धाम में कदम रखने वाला प्रत्येक भक्त इसकी गरिमा को बनाए रखने का संकल्प लेकर आए।

कचरा फैलाने और गंदगी पर संतों की चिंता

धर्माचार्यों ने कहा कि वृंदावन भगवान का परम मंगलमय धाम है और इसकी पवित्रता की रक्षा करना हर श्रद्धालु का पहला कर्तव्य है। इसके तहत श्रद्धालुओं को मंदिरों, घाटों और सार्वजनिक स्थानों पर भोजन के दोने-पत्तल, प्लास्टिक या अन्य कचरा इधर-उधर फेंकने से बचना चाहिए। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर थूकना या स्वच्छता के नियमों की अनदेखी करना धाम की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है, क्योंकि संतों के अनुसार तीर्थ की सेवा केवल पूजा-पाठ से नहीं बल्कि उसे स्वच्छ रखने से भी होती है।

नशा और अभद्र व्यवहार से दूर रहने का संदेश

वृंदावन को सेवा, साधना और सदाचार की भूमि बताते हुए संतों ने श्रद्धालुओं से अपने आचरण में संयम और विनम्रता लाने का आग्रह किया है। इसके लिए संतों ने धाम क्षेत्र में नशा, अभद्र भाषा, अनैतिक गतिविधियों और अशोभनीय आचरण से पूरी तरह दूर रहने की अपील की। उनका मानना है कि तीर्थस्थलों पर अनुशासन, संयम और सेवा की भावना ही भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा और भक्ति का वास्तविक प्रमाण है।

आध्यात्मिक वातावरण का संरक्षण जरूरी

धर्माचार्यों का मानना है कि वृंदावन की असली पहचान केवल इसके भव्य मंदिरों से नहीं, बल्कि यहां के दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण से है। यदि हर भक्त स्वच्छता और धार्मिक मर्यादा का पालन करेगा, तो आने वाली पीढ़ियां भी वृंदावन के इसी अलौकिक और दिव्य स्वरूप का आनंद ले सकेंगी। इसलिए संतों ने सभी से आह्वान किया है कि वे केवल दर्शन-पूजन तक सीमित न रहें, बल्कि धाम के संरक्षण और स्वच्छता अभियान में अपना सक्रिय योगदान दें।

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