यूनिक समय, मथुरा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मथुरा जिले में स्थित श्री राधारानी की परम पवित्र प्राकट्य भूमि रावल गांव में जन्मोत्सव का पावन पर्व अत्यंत उल्लास, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जा रहा है। समूचे ब्रजमंडल के साथ-साथ रावल धाम में राधारानी के प्राकट्य दिवस को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। रावल धाम का पौराणिक महत्व धार्मिक मान्यताओं और ब्रज की पौराणिक कथाओं के अनुसार रावल गांव ही वह पावन स्थल है जहां जगत जननी श्री राधारानी का इस धरा पर प्रथम प्राकट्य हुआ था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी की पावन तिथि को राजा वृषभानु जी को यमुना जी में तैरते हुए एक अलौकिक कमल के पुष्प पर बाल रूप में लाडली जी (श्री राधारानी) प्राप्त हुई थीं। रावल गांव की इस पावन माटी से राधारानी के प्राकट्य की कथा जुड़ी होने के कारण इस स्थान का धार्मिक महत्व अत्यंत विशिष्ट माना जाता है। मंदिर प्रांगण में धार्मिक अनुष्ठानों की धूम राधा अष्टमी के इस पावन अवसर पर रावल स्थित मंदिर में तड़के से ही विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है। शुभ मुहूर्त में आचार्यों और सेवायतों द्वारा लाडली जी के श्री विग्रह का दूध, दही, शहद, घी और यमुना जल से भव्य पंचामृत अभिषेक कराया गया। इसके उपरांत श्री जी को नवीन वस्त्र धारण कराकर मनमोहक श्रृंगार अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में साधु-संतों और स्थानीय निवासियों द्वारा बधाई पदों का गायन किया जा रहा है। बधाई पदों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम रहे हैं और चारों ओर 'राधे-राधे' के जयघोष से वातावरण गुंजायमान है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Radha Astami: श्री धाम वृंदावन में राधा अष्टमी की धूम; आज श्री राधारानी के स्वरुप में दर्शन दे रहे हैं ठाकुर बांके बिहारी जी ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]