यूनिक समय, वृन्दावन। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी यानी राधा अष्टमी के परम पावन अवसर पर समूचा ब्रजमंडल श्रीराधारानी के जन्मोत्सव के आनंद और उल्लास में सराबोर है। बरसाना से लेकर श्री धाम वृंदावन तक हर ओर 'राधे-राधे' की दिव्य गूंज सुनाई दे रही है। इस विशेष पर्व पर वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं को अद्भुत और अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। वर्ष में केवल एक बार मिलता है यह पावन दर्शन राधा अष्टमी का दिन बांके बिहारी जी के भक्तों के लिए अत्यंत विशेष और भक्तिमय होता है। इस पावन तिथि पर ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज स्वयं अपनी आह्लादिनी शक्ति श्री राधारानी का भेष धारण करते हैं। आज के दिन ठाकुर बांके बिहारी जी को राधारानी की तरह लहंगा, चुनरी और विशेष आभूषण धारण कराए जाते हैं। इस दिव्य और अद्वितीय स्वरूप के दर्शन के लिए मंदिर प्रांगण में तड़के से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है। बिहारी जी के चरणों के दर्शन का दुर्लभ सौभाग्य राधा अष्टमी के इस पावन पर्व पर बांके बिहारी मंदिर में एक और अत्यंत दुर्लभ परंपरा निभाई जाती है। सामान्य दिनों में ठाकुर जी के श्री चरण वस्त्रों से ढके रहते हैं, लेकिन राधा अष्टमी के शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं को बिहारी जी के श्री चरणों के प्रत्यक्ष दर्शन करने का परम सौभाग्य प्राप्त होता है। स्वामी हरिदास जी महाराज के लाडले ठाकुर बांके बिहारी जी के इस मनमोहक स्वरूप को निहारकर देश-विदेश से आए श्रद्धालु भाव-विभोर हो रहे हैं और पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज रहा है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Radha Astami: भोर 4 बजे वेदमंत्रों के साथ प्रकट हुईं श्रीराधारानी; 25 किलो दूध से जन्माभिषेक, शीश महल से दिए दर्शन ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]