यूनिक समय, मथुरा। टीवी डिबेट के दौरान अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास द्वारा कांग्रेस प्रवक्ता के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी किए जाने का मामला अब गंभीर राजनीतिक और सामाजिक रूप अख्तियार करता जा रहा है। मंगलवार को इस घटना के विरोध में मथुरा में निषाद समाज का भारी जनाक्रोश देखने को मिला। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी और कांग्रेस प्रवक्ता कुंवर सिंह निषाद के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। दामोदरपुरा से कलेक्ट्रेट तक निकाला पैदल मार्च मंगलवार सुबह निषाद समाज के लोग मथुरा के दामोदरपुरा इलाके में एकत्र हुए, जहां से कलेक्ट्रेट परिसर तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला गया। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर जब जिलाधिकारी (DM) मौके पर मौजूद नहीं मिले, तो प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बढ़ गया। जिलाधिकारी की गैरमौजूदगी से आक्रोशित होकर प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित वट वृक्ष के नीचे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। इस दौरान स्थिति को संभालने और ज्ञापन लेने पहुंचे एडीएम (न्यायिक) और सिटी मजिस्ट्रेट से वार्ता करने से ग्रामीणों ने स्पष्ट इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारी केवल जिलाधिकारी को ही मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे, जिसके कारण प्रशासनिक अधिकारियों को जनआक्रोश के बीच बिना ज्ञापन लिए ही बैरंग वापस लौटना पड़ा। कांग्रेस प्रवक्ता कुंवर सिंह निषाद का गंभीर आरोप प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे कांग्रेस प्रवक्ता कुंवर सिंह निषाद ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और शासन तंत्र महंत राजू दास को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस और प्रशासन के हर पटल पर लिखित शिकायत दर्ज कराने और 9 दिन बीत जाने के बाद भी मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जिससे साफ जाहिर होता है कि ऊपरी स्तर से कार्रवाई न करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही महंत राजू दास की सफाई को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि घटना का पूरा वीडियो सार्वजनिक डोमेन में मौजूद है, और यह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे निषाद समाज का अपमान है। बिहार से मथुरा पहुंचे मुकेश साहनी का हमला प्रदर्शन में विशेष रूप से शामिल होने बिहार से मथुरा पहुंचे वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश साहनी ने उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्य में लोकतंत्र चल रहा है या राजतंत्र, क्योंकि यदि लोकतंत्र है तो पीड़ित पक्ष की शिकायत पर तत्काल मुकदमा दर्ज होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में जाति और धर्म देखकर प्रशासनिक कार्रवाई करने का आरोप भी लगाया। मुकेश साहनी ने आगे कहा कि समाज की पारंपरिक जीवनशैली और खान-पान पर अमर्यादित टिप्पणी करना पूरी तरह अनुचित है, और ऐतिहासिक रूप से बीहड़ क्षेत्रों में अपनी परिस्थितियों के अनुसार जीवन यापन करने वाले निषाद समाज पर ऐसी टिप्पणियां किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होंगी। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: NEET पेपर लीक प्रदर्शन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR रद्द करने का दिया आदेश ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]