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छाता शुगर मिल: पुलिस कार्रवाई से भड़का जनाक्रोश; मुकदमों की धमकियों के बीच दर्जनों किसानों ने घेरा धरना स्थल

by Tarun Bhardwaj • September 1, 2026
Public outrage flares up following police action during the Chhata Sugar Mill agitation

छाता शुगर मिल: पुलिस कार्रवाई से भड़का जनाक्रोश; मुकदमों की धमकियों के बीच दर्जनों किसानों ने घेरा धरना स्थल

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यूनिक समय, मथुरा। छाता में पिछले कई दिनों से बंद पड़ी शुगर मिल को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन अब एक बेहद संवेदनशील और जनाक्रोश के दौर में पहुंच गया है। आंदोलन को दबाने के लिए प्रशासनिक और पुलिस तंत्र द्वारा अपनाए जा रहे कथित रवैये के खिलाफ पूरे ब्रज क्षेत्र में गहरा रोष व्याप्त हो गया है। बीती रात पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक और उससे जुड़े वीडियो वायरल होने के बाद आसपास के दर्जनों गांवों से ग्रामीण स्वतः स्फूर्त होकर धरना स्थल पर जुटने लगे हैं।

गांवों से पहुंचे किसान और युवा

बीती रात घटे घटनाक्रम और पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज करने की कथित धमकियों के बाद स्थानीय जनता का गुस्सा चरम पर है। धरना स्थल पर स्थिति यह है कि रनवारी, नरी, छाता, अलवाई, सेमरी, विशम्भरा, नगला बिरजा और साँखी सहित दर्जनों गांवों से किसान, युवा और बुजुर्ग लगातार पहुंच रहे हैं। अचानक बढ़ी भीड़ और जनसैलाब के कारण पूरा धरना स्थल एक बड़ी महापंचायत और छावनी के रूप में तब्दील हो चुका है। इसके साथ ही आंदोलन की अगुवाई कर रहे पूर्व सैनिकों और क्षेत्रीय ग्रामीणों ने एकजुट होकर एक सुर में प्रशासन के रवैये की कड़ी निंदा की है।

‘डराने की रणनीति से नहीं झुकेगा आंदोलन’

धरने पर बैठे किसान नेताओं और ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन झूठे मुकदमे दर्ज करने और डराने-धमकाने की रणनीति अपनाकर इस जन आंदोलन को कुचलना चाहता है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक छाता चीनी मिल के पुनरुद्धार को लेकर कोई ठोस और लिखित कदम नहीं उठाए जाते, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं होगा। उन्होंने किसानों और पूर्व सैनिकों का उत्पीड़न तुरंत बंद करने की मांग की है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि प्रशासनिक दबाव के बावजूद क्षेत्र की जनता पीछे हटने को तैयार नहीं है, और यदि यह उत्पीड़न जारी रहा तो यह संघर्ष और भी व्यापक रूप धारण करेगा।

हजारों परिवारों का भविष्य

स्थानीय जनता का कहना है कि 17 वर्षों से बंद पड़ी यह चीनी मिल केवल एक सरकारी ढांचा नहीं, बल्कि क्षेत्र के हजारों किसान परिवारों की आजीविका और युवाओं के रोजगार का जरिया है। प्रशासन की सख्ती के सामने ग्रामीणों की इस अप्रत्याशित एकजुटता ने यह साफ कर दिया है कि छाता शुगर मिल का मुद्दा अब एक बड़ा जनआंदोलन बन चुका है।

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