यूनिक समय, नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की घटना की जांच में नित नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अभिनेताओं को निशाना बनाने के लिए पकड़े गए तीनों आरोपियों को कथित तौर पर 34 हजार रुपये देने का वादा करने के साथ-साथ विदेश में नौकरी दिलाने का भी लालच दिया गया था। इस पूरे मामले में अनिल पंडित नाम के एक संदिग्ध की भूमिका सामने आ रही है, जिसे कैलिफोर्निया में बैठकर इस आपराधिक नेटवर्क को संचालित करने का शक है। हालांकि, इन सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। कोटा में रातभर पूछताछ, मुंबई ले जाने की तैयारी फिलहाल मामले में पकड़े गए तीनों आरोपी कोटा के रेलवे स्टेशन और पुलिस हिरासत में हैं, जहां मुंबई पुलिस की टीम ने उनसे रातभर तीन चरणों में गहन पूछताछ की है। इस पूछताछ में पुलिस को कई अहम सुराग हाथ लगने की बात कही जा रही है। मंगलवार, 20 अक्टूबर को सुबह करीब आठ बजे पुलिस तीनों आरोपियों को सड़क मार्ग से अपने साथ मुंबई लेकर रवाना हो चुकी है, ताकि वहां घटना से जुड़ी कड़ियों को जोड़ा जा सके। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कौन है, इन्हें हथियार किसने मुहैया कराए और इसे किस तरह अंजाम दिया गया। जांगी ऐप से निर्देश जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों की अनिल पंडित से कभी आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई थी, बल्कि वे सभी जांगी ऐप यानी Jangi App के जरिए आपस में संपर्क में रहते थे। इस ऐप की खासियत यह है कि इसमें अकाउंट बनाने के लिए किसी फोन नंबर या निजी जानकारी की जरूरत नहीं पड़ती। इसी के तहत आरोपियों को वारदात को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर प्रतिदिन 5 हजार से 10 हजार रुपये ऑनलाइन भेजे जाते थे, जिसके लेन-देन का सुराग छिपाने के लिए स्थानीय दुकानदारों के QR कोड का इस्तेमाल किया जाता था जहाँ आरोपी क्यूआर कोड भेजते थे और उनके खर्च के लिए रकम ट्रांसफर कर दी जाती थी। जिस कारण पुलिस अब इन वित्तीय लेन-देन और खातों की बारीकी से जांच कर रही है। पहचान छिपाने के लिए बदले हुलिया और ठिकाने घटना को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए पूरी प्लानिंग की थी, जिसके तहत वे अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे और लोकल ट्रेन पकड़ी, और कुछ दूर जाने के बाद उन्होंने ऑनलाइन टैक्सी बुक की और सूरत की ओर निकल पड़े। जिसके बाद वे पुणे-जयपुर एक्सप्रेस में सवार हुए, और सफर के दौरान उन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए बाल कटवा लिए और कपड़े भी बदल लिए, ताकि कोटा में पकड़े जाने पर उनका हुलिया बदला हुआ मिले। हालाँकि पुलिस ने उनके पास से केवल कपड़े बरामद किए हैं और उनके पास से कोई हथियार नहीं मिला है क्योंकि जांचकर्ता यह मानकर चल रहे हैं कि उन्होंने रास्ते में ही हथियार कहीं फेंक दिए हों। इसके अलावा ऋतिक नाम के एक आरोपी द्वारा चोरी की मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आई है। कचरे के ढेर से मिलते थे हथियार सूत्रों के अनुसार, आरोपियों को हथियार इंदौर और मुंबई में मौजूद संपर्कों के जरिए मिलने का संदेह है। हथियार सीधे देने के बजाय किसी सुनसान जगह पर छिपाए जाते थे और आरोपियों को लोकेशन व वीडियो भेजकर कचरे के पास रखे बॉक्स से हथियार उठाने के निर्देश मिलते थे। बातचीत के बाद आरोपी सिम कार्ड भी फेंक देते थे ताकि लोकेशन ट्रेस न हो सके। इसके साथ ही जांच में यह भी एंगल सामने आया है कि रेहान और फूल सिंह नामक आरोपियों का नाता पहले अमृतसर में एक कारोबारी पर हुए हमले से भी जुड़ सकता है। मुंबई पहुंचने के बाद आरोपियों से होने वाली विस्तृत पूछताछ से इस पूरे सिंडिकेट और उसके अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों का पूरी तरह पर्दाफाश हो सकेगा। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Vijayadashami 2026: नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का विजयादशमी संबोधन; ‘स्व’ की भावना पर दिया जोर ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]