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Commercial Cylinder Price: सिलिंडर की कीमतों में बड़ा इजाफा; कमर्शियल सिलेंडर ₹993 और ‘छोटू’ ₹261 हुआ महंगा

by Tarun Bhardwaj • May 1, 2026
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यूनिक समय, नई दिल्ली। मई महीने की शुरुआत देश के मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए आर्थिक बोझ लेकर आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक संकट के बीच, भारत में कमर्शियल और छोटे एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भारी इजाफा किया गया है।

सिलेंडर की कीमतों में बड़ा उछाल

आज से लागू हुई नई दरों ने कमर्शियल और छोटे गैस सिलेंडरों के उपभोक्ताओं को बड़ा झटका दिया है। 19 किलो कमर्शियल सिलिंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद दिल्ली में अब यह सिलेंडर ₹2,078.50 के बजाय ₹3,071.50 में मिलेगा। वही 5 किलो ‘छोटू’ सिलेंडर की कीमत में ₹261 का इजाफा हुआ है। जो सिलेंडर कल तक ₹549 में मिलता था, अब उसकी कीमत ₹810 हो गई है।

इन उत्पादों की कीमतें रहीं स्थिर

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है ताकि आम जनता को बढ़ती महंगाई से राहत मिल सके। सरकार ने लगभग 33 करोड़ उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखते हुए घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो सिलिंडर) की कीमतों को पूरी तरह स्थिर रखा है।

इसी तरह, आम आदमी के परिवहन और रसद को प्रभावित करने वाले पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में भी कोई संशोधन नहीं किया गया है। विमानन क्षेत्र की बात करें तो घरेलू एयरलाइनों के लिए विमानन ईंधन (ATF) की दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय वाहकों के लिए कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से गरीब तबके को मिलने वाले मिट्टी के तेल (केरोसिन) की कीमतों में भी कोई वृद्धि नहीं की गई है।

किस पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

महंगाई की यह मार विशेष रूप से उन वर्गों पर पड़ी है जो दैनिक आय पर निर्भर हैं। 5 किलो वाले सिलिंडर का उपयोग करने वाले प्रवासी मजदूर और दूसरे शहरों में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों के मासिक बजट में अब भारी वृद्धि होगी। रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे ढाबा संचालकों के लिए अब व्यापार करना और चूल्हा जलाना महंगा हो जाएगा।

ईरान संकट और वैश्विक कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में हुई इस हालिया वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। बीते 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी (LPG) का संकट काफी गहरा गया है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर अब भारतीय बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

ईंधन की इस किल्लत और लगातार बढ़ती कीमतों के कारण दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे बड़े औद्योगिक शहरों में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बीच भारी चिंता है, जिसके चलते वहां से पलायन का सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका है। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का कहना है कि यह मूल्य संशोधन केवल उन चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सीमित है, जिनकी कुल खपत में हिस्सेदारी करीब 16 प्रतिशत है।

ये क्षेत्र वैश्विक बेंचमार्क के आधार पर किए जाने वाले नियमित मासिक समायोजन के अधीन आते हैं, जबकि लगभग 80 प्रतिशत उत्पादों की कीमतों को स्थिर रखकर आम जनता को राहत देने का प्रयास किया गया है।

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