यूनिक समय, नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, केंद्र सरकार और संबंधित सभी एजेंसियों को सख्त हिदायत दी है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि बलात्कार जैसे अपराध किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किए जा सकते। शीर्ष अदालत ने कहा कि पुलिस का असली काम केवल घटना के बाद आरोपी को पकड़ना या गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि अपराध को घटित होने से पहले रोकना है। 'वॉर रूम' और राष्ट्रीय डेटाबेस का इस्तेमाल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि अपराधों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए क्या दिल्ली में 'वॉर रूम' स्थापित करने का कोई प्रावधान है, जैसे कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में बनाए गए हैं। इसके साथ ही, कोर्ट ने 'नेशनल डेटाबेस ऑन सेक्सुअल ऑफेंडर्स' (NDSO) के माध्यम से यौन अपराधों में शामिल रहे और संदिग्ध तत्वों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि यदि सभी एजेंसियां मिलकर और तालमेल के साथ काम करें, तो स्थिति में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। 2012 के निर्भया कांड का जिक्र अदालत को अवगत कराया गया कि दिल्ली में हजारों बिना अनुमति (अवैध) चल रहे खाने-पीने के ठिकाने हैं, जहाँ असामाजिक तत्व एकत्र होते हैं और कुछ जगहों पर अवैध रूप से शराब भी परोसी जाती है। इस पर 2012 के ऐतिहासिक निर्भया कांड का जिक्र करते हुए जस्टिस जे.बी. पारदीवाला ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार उस मामले के आरोपियों ने भी अपराध से पहले एक ढाबे पर खाना खाया और शराब पी थी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी बिना अनुमति वाले ठिकानों पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई की जाए। कॉलेजों के पास गश्त, पुलिस भर्ती और 'आर्टिकल 21' पर रुख सुनवाई के दौरान अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों और छात्राओं की सुरक्षा पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए महिला कॉलेजों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाने और असामाजिक तत्वों पर त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस बल में संसाधनों या जवानों की कमी है, तो तुरंत नई भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जाए और कर्मियों को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा कि केवल कागजों पर नीतियां बनाने से सुधार संभव नहीं है, बल्कि पुलिस को धरातल पर अपराधियों के मन में खौफ पैदा करना होगा और मानवाधिकार या कानूनी प्रश्नों के बावजूद अपनी प्राथमिक सुरक्षा जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना होगा। सार्वजनिक स्थलों पर लाइटिंग सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त रोशनी (लाइटिंग) सुनिश्चित करने के लिए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता के माध्यम से व्यवस्था करने को कहा। आगामी दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान असामाजिक तत्वों के सक्रिय होने की संभावना पर कड़ी निगरानी रखने और अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक बसों में अकेले सफर करने वाली महिला की सुरक्षा तक की जानकारी और सक्रियता पुलिस के पास होनी चाहिए। मामले में जमीनी सुधारों और प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के लिए अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: आधार में नाम संशोधन को लेकर UIDAI ने जारी की नई एसओपी; बदलाव और बड़े संशोधनों के लिए नए नियम लागू [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]