यूनिक समय, नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की 57वीं बैठक में करदाताओं और व्यापारियों के हित में कई दूरगामी और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। बैठक का मुख्य ध्यान टैक्स की दरों में बदलाव के बजाय व्यापार को सुगम बनाने (Ease of Doing Business) और प्रशासनिक जटिलताओं को दूर करने पर केंद्रित रहा। काउंसिल ने 'जीएसटी 2.0' की दिशा में कदम बढ़ाते हुए इंस्पेक्टर राज और कागजी कार्रवाई को समाप्त कर पूरे सिस्टम को डेटा और स्वचालन (Automation) आधारित बनाने की दिशा में बड़े सुधारों को मंजूरी दी है। गिरफ्तारी के अधिकार समाप्त बैठक के सबसे बड़े प्रशासनिक सुधार के अंतर्गत जीएसटी अधिकारियों से मनमानी गिरफ्तारी का अधिकार पूरी तरह से वापस ले लिया गया है। इसके तहत मुकदमेबाज़ी (प्रॉसिक्यूशन) शुरू करने की न्यूनतम सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सामान्य उल्लंघनों पर लगने वाले जुर्माने की राशि को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। वहीं चेकिंग व्यवस्था को दुरुस्त करते हुए रास्ते में माल ले जा रही गाड़ियों की रैंडम चेकिंग पर रोक लगा दी गई है, जिसके अनुसार अब केवल पक्की खुफिया जानकारी और जॉइंट कमिश्नर रैंक के अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बाद ही चेकिंग संभव होगी, तथा ट्रांजिट (रास्ते के) राज्यों को गाड़ियों की चेकिंग करने का अधिकार नहीं होगा। 3 दिन में ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन और रिफंड प्रक्रिया व्यापारियों की वर्किंग कैपिटल और समय की बचत के लिए रजिस्ट्रेशन और रिफंड सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल और तेज कर दिया गया है। इसके अंतर्गत 'कम जोखिम' वाले कारोबारियों को बिना किसी अधिकारी के दखल के 3 दिन के भीतर सिस्टम द्वारा ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन जारी किया जाएगा, तथा नाम, पते या निदेशक परिवर्तन जैसी प्रविष्टियां भी स्वतः मंजूर होंगी। वहीं त्वरित रिफंड की व्यवस्था करते हुए 90 प्रतिशत मामलों में रिफंड क्लेम अधिकारी के बजाय सिस्टम खुद 3 दिन के भीतर मंजूर करेगा, और रिफंड स्वीकार करने की समय-सीमा को 15 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया गया है। ITC और छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत काउंसिल ने टैक्स रिफंड और क्रेडिट क्लेम से जुड़े कई व्यावहारिक नियमों को सरल बनाते हुए व्यापारियों को बड़ी राहत दी है। इसके तहत कर्मचारियों के हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस, टेलीकॉम टावर, बाहरी पाइपलाइन और एक्सपायर हो चुके फ्री सैंपल्स पर भी अब इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ मिलेगा। इसके अलावा हॉस्पिटैलिटी, रेस्टोरेंट और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर्स में एजेंट के माध्यम से होने वाली एक ही सर्विस की बार-बार खरीद-बिक्री पर लगने वाले दोहरे कर को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। वहीं 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले और सीधे ग्राहकों को सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों को अब साल में केवल एक बार रिटर्न दाखिल करने तथा तिमाही आधार पर टैक्स जमा करने की सुविधा दी गई है, जबकि छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता अब दूसरे राज्यों में स्थित अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स के गोदामों को ही अपना आधिकारिक पता दर्शाकर देश भर में सुगमता से कारोबार कर सकेंगे। टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं परिषद ने स्पष्ट किया है कि 57वीं बैठक में किसी भी वस्तु या सेवा की कर दरों (GST Rates) में संशोधन नहीं किया गया है। टैक्स स्लैब और दरों की समीक्षा के लिए अब वर्ष में केवल एक बार विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि काउंसिल का शेष समय प्रक्रियाओं के सरलीकरण और प्रणालीगत सुधारों पर केंद्रित रह सके। नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह भी पढ़े: Asian Champions Trophy 2026: भारत में खेलने से पाकिस्तान का इनकार; AHF ने किया बाहर, बांग्लादेश की हुई एंट्री ताजा खबरों के साथ अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp Channel को जरूर सब्सक्राइब करें। [web_stories title="true" excerpt="false" author="false" date="false" archive_link="true" archive_link_label="" circle_size="150" sharp_corners="false" image_alignment="left" number_of_columns="1" number_of_stories="8" order="DESC" orderby="post_date" view="carousel" /]